मुंबई , जुलाई 22 -- वंचित बहुजन आघाड़ी (वीबीए) ने नयी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के पक्ष में गुरुवार को 'महाराष्ट्र बंद' का आह्वान किया है।
वीबीए अध्यक्ष एवं डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के पोते प्रकाश अम्बेडकर ने आज यहां प्रेस वार्ता में बताया कि वामपंथी राजनीतिक दलों, शैक्षणिक संस्थानों और कोचिंग सेंटरों ने बंद का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार छात्र आंदोलनों से इतनी डरी हुई है कि उसने प्रादेशिक सेना तक को तैनात कर दिया है। वामपंथी दलों और शैक्षणिक संस्थानों ने हमारे बंद का समर्थन किया है, वहीं राज्य के कोचिंग संस्थान भी हमारे संपर्क में हैं।"उन्होंने कहा, "हम नयी पीढ़ी खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। मेरा मानना है कि सरकार को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। छात्रों के आंदोलन पर सरकार ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है, इसलिए 23 जुलाई का महाराष्ट्र बंद होकर रहेगा। मेरी यह भी राय है कि राहुल गांधी को जंतर-मंतर जाकर विरोध प्रदर्शन करना चाहिए।"उन्होंने यह भी कहा कि यह छात्र आंदोलन हालांकि उनका नहीं है, फिर भी वह इसका पूरा समर्थन करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा के छात्र संगठन से भी इस इस बंद में हिस्सा लेने की अपील की।
वीबीए प्रमुख ने कहा, "इस बंद को सफल बनाने के लिए हम मजदूर यूनियनों, बेस्ट यूनियनों, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की यूनियनों और अन्य श्रमिक संगठनों से चर्चा कर रहे हैं। दिल्ली में छात्रों पर अमानवीय अत्याचार हुए हैं, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है। कई संगठन इस बंद में शामिल होने को उत्सुक हैं।"उन्होंने कहा "दिल्ली में छात्र आंदोलन को कुचलने के लिए कश्मीर से रिजर्व पुलिस बल बुलाये गये हैं, जिसका हम कड़ा विरोध करते हैं। हमारी कोशिश है कि सरकार छात्रों पर आंसू गैस या बल प्रयोग न करे। हमने भाजपा को छोड़कर सभी दलों से बंद में शामिल होने की अपील की है, ताकि आंदोलनकारी छात्रों के प्रति एकजुट होकर हम समर्थन दिखा सकें।"यह भी गौरतलब है कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) या मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की ओर से कल के बंद के समर्थन में अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
इससे पहले मुंबई पुलिस ने आज दादर वेस्ट में समुद्र तट पर स्थित ऐतिहासिक चैत्यभूमि पर वामपंथी दलों की ओर से आयोजित शांतिपूर्ण सभा को तितर-बितर कर दिया। यह स्थान डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का समाधि स्थल होने के साथ-साथ दलित समुदाय के लिए प्रमुख तीर्थ स्थल भी है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार एहतियाती तौर पर चैत्यभूमि से हिरासत में लिए गये भाकपा के कॉमरेड मिलिंद रानाडे और अन्य कार्यकर्ताओं को नजरबंद कर दिया गया है। वहीं माकपा के कॉमरेड शैलेंद्र कांबले और शेतकारी कामगार पार्टी (पीडब्ल्यूपी) के राजू कोरडे के आवासों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।
उन्होंने बताया कि एहतियाती कार्रवाई के तहत भाकपा से जुड़े अखिल भारतीय छात्र संघ (एआईएसएफ) के युवा नेता कॉमरेड आमिर काजी और पीडब्ल्यूपी के साम्य कोरडे को चेतावनी दी गयी है कि यदि वे अपने घरों से बाहर निकले तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जायेगा।
इस बीच मुंबई पुलिस ने चैत्यभूमि को भारी बैरिकेड्स और नाकेबंदी लगाकर पूरी तरह से सील कर दिया है, जहां पहले से ही एक स्थायी पुलिस चौकी मौजूद है। प्रदर्शनकारी जहां तक संभव हो छोटे समूहों में जुटने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारी तंग गलियों से होते हुए चैत्यभूमि पहुंचे, तो कुछ ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन किये।
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