रांची , दिसंबर 09 -- झारखंड में लंबित छात्रवृत्ति भुगतान को लेकर जारी असमंजस पर आदिवासी कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने मंगलवार को विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्र सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए।
श्री लिंडा ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार के पास बजट उपलब्ध होने के बावजूद केंद्र से मिलने वाले हिस्से पर स्थिति स्पष्ट नहीं है, जिसके कारण तकनीकी बाधाएं खड़ी हो रही हैं और समय पर राशि जारी नहीं हो पा रही है।
मंत्री श्री लिंडा ने कहा कि राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है, लेकिन "जब तक केंद्र का इंटेंशन क्लियर नहीं होगा, तब तक समस्या का समाधान संभव नहीं है।" उन्होंने बताया कि कई योजनाओं में केंद्र-राज्य साझेदारी व्यवस्था के तहत दोनों सरकारों को अपना-अपना हिस्सा देना होता है। ऐसे मामलों में यदि केंद्र का शेयर नहीं पहुंचता है, तो वित्त विभाग आगे की प्रक्रिया नहीं बढ़ा सकता।
उन्होंने कहा, "हमारे पास बजट का प्रावधान है, लेकिन केंद्र का हिस्सा आए बिना हम दरवाजा ओपन नहीं कर सकते। बजट होते हुए भी दरवाजे बंद रहते हैं-यही सबसे बड़ी तकनीकी समस्या है।"श्री लिंडा ने बताया कि कक्षा 1 से 8 तक की छात्रवृत्ति में कोई बाधा नहीं है क्योंकि इसका पूरा वहन राज्य सरकार करती है। इसके लगभग 70 प्रतिशत भुगतान पूरे किए जा चुके हैं। किंतु जहां केंद्र की साझेदारी है, वहीं संकट गहरा रहा है।
श्री लिंडा ने केंद्र द्वारा लागू की गई नई प्रक्रिया को भी समस्या की जड़ बताया। उन्होंने कहा कि पहले राज्य धनराशि की मांग करता था और केंद्र उसे जारी करता था, लेकिन अब केंद्र की ओर से तय ढांचा बदल दिया गया है।
मंत्री ने आशंका जताई कि अभी तक केंद्र से जो 3-4 करोड़ रुपये आए हैं, वे भी नई व्यवस्था के चलते वापस हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि सेशन समाप्त होते ही वे दिल्ली जाकर केंद्रीय अधिकारियों से पूरी स्थिति पर विस्तार से बातचीत करेंगे और समाधान निकालने की कोशिश करेंगे।
श्री लिंडा ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार छात्रों को उनका अधिकार दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाएगी, लेकिन केंद्र की स्पष्टता और सहयोग के बिना यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती।
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