बलरामपुर-रामानुजगंज , मार्च 13 -- छत्तीसगढख् के बलरामपुर जिले के थाना कोरंधा क्षेत्र के दूरस्थ ग्राम तुर्रीपानी खजुरी में पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने अवैध रूप से की जा रही मादक पदार्थ अफीम की खेती का पर्दाफाश किया और इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए एंड टू एंड विवेचना जारी है।
पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार गुरुवार को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ग्राम तुर्रीपानी खजुरी में सहादुर नगेशिया और दुईला नगेशिया नाम के व्यक्ति अपने खेत में अवैध रूप से अफीम की खेती कर रहे हैं। सूचना की तस्दीक के लिए अनुविभागीय अधिकारी कुसमी और थाना प्रभारी कुसमी के नेतृत्व में एस.एफ.एल., प्रशासन और अन्य विभागों की संयुक्त टीम का गठन किया गया।
टीम जब मौके पर पहुंची तो खेत में अवैध अफीम की फसल लहलहा रही थी। इस दौरान आरोपी सहादुर नगेशिया (34) और दुईला नगेशिया (40), दोनों निवासी खजूरी (तुर्रीपानी), पुलिस टीम को देखकर भागने लगे लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों को पकड़ लिया।
पंचों के समक्ष की गई कार्यवाही में अफीम के पौधों को जड़, तना, पत्ती, फूल और फल सहित उखाड़कर जब्त किया गया। तौल करने पर कुल 1883.76 किलोग्राम अफीम बरामद हुई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग दो करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ मादक द्रव्यो एवं मनोत्तेजक पदार्थ. अधिनियम की धारा 8/18 के तहत अपराध दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर के निर्देशन में मामले की गहन विवेचना की जा रही है। आरोपियों के वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है ताकि इस गिरोह के तारों को जोड़ा जा सके। पुलिस का मानना है कि यह खेती किसी बड़े रैकेट के तहत की जा रही थी।
वहीं, इस मामले को लेकर जिला प्रशासन भी सख्त मोड में दिखाई दे रहा है। कलेक्टर राजेन्द्र कटारा ने बताया कि तुर्रीपानी में राजस्व, पुलिस एवं वन विभाग की संयुक्त टीम ने यह कार्यवाही की। यह क्षेत्र झारखंड सीमा से लगा हुआ है और यहां जंगलों के बीच लगभग 1.47 एकड़ रकबे में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही थी।
कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने बताया कि जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह की अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह से अंकुश लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राजस्व, पुलिस, वन विभाग और पंचायत की संयुक्त टीमें लगातार सघन निरीक्षण अभियान चला रही हैं। जांच के दौरान यह पाया गया कि बाहरी व्यक्तियों की मिलीभगत से इस खेती को अंजाम दिया जा रहा था।
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