रायपुर , सितंबर 17 -- छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले में पिछले 25 वर्षों के दौरान सिंचाई क्षमता में छह गुना से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य गठन के समय जिले में 4,458 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की क्षमता थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 25,936 हेक्टेयर हो गई है।
जल संसाधन विभाग से गुरुवार को मिली जानकारी के अनुसार एक नवंबर 2000 से पहले जिले में कुल 28 जल संसाधन परियोजनाएं निर्मित थीं। इनमें 17 जलाशय, चार व्यपवर्तन योजनाएं, दो स्टॉप डेम और पांच एनीकट शामिल थे। इन परियोजनाओं से 4,458 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध थी और कृषि काफी हद तक मानसूनी वर्षा पर निर्भर थी।
राज्य गठन के बाद जिले में 57 नई जल संसाधन परियोजनाओं का निर्माण किया गया। पुरानी और नई परियोजनाओं को मिलाकर अब जिले में कुल 85 जल संसाधन योजनाएं हैं। इनके माध्यम से सिंचाई क्षमता में 21,476 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है।
विभाग के मुताबिक सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के साथ पुरानी नहरों का जीर्णोद्धार और विस्तार किया गया है। दूर-दराज के खेतों तक पानी पहुंचाने के साथ माइक्रो एवं लिफ्ट इरिगेशन, सोलर पंप और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया गया है। इसके अलावा एनीकट निर्माण, नदी संरक्षण और भू-जल संवर्धन के कार्य किए गए हैं।
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