रायपुर , सितंबर 23 -- छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में आरोपी कांग्रेस के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को अदालत से राहत नहीं मिली है।

बुधवार को वकीलों से मिली जानकारी के अनुसार रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत ने मंगलवार को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। अग्रवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 11 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया था।

ईडी ने गिरफ्तारी के बाद अग्रवाल को अदालत में पेश कर हिरासत में लिया था और शुरुआती दिनों में कस्टोडियल रिमांड पर उनसे पूछताछ की थी। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था।

इससे पहले करीब तीन साल तक जांच एजेंसियों की पहुंच से बाहर रहे अग्रवाल आठ जुलाई को आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) के कार्यालय पहुंचे थे। इसके बाद उनका मेडिकल परीक्षण कर अदालत में पेश किया गया था। अदालत ने नौ जुलाई से 17 जुलाई तक उनकी पुलिस रिमांड मंजूर की थी। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया चली और बाद में ईडी ने उन्हें धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया।

ईडी के अनुसार, धनशोधन की जांच रायपुर ईओडब्ल्यूj/एसीबी की ओर से दर्ज प्राथमिकी तथा रायपुर की विशेष अदालत में दाखिल आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र के आधार पर शुरू की गई। इनमें वर्ष 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ के आबकारी प्रशासन में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं।

कथित शराब घोटाले की जांच में एजेंसियां सरकारी शराब कारोबार में कथित अनियमितताओं, अवैध वसूली और रकम के लेन-देन से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि शराब कारोबार में एक संगठित नेटवर्क के माध्यम से बड़ी रकम का लेन-देन किया गया।

मामले में अलग-अलग स्तर पर घोटाले की राशि 3200 करोड़ रुपये से अधिक और करीब 3400 करोड़ रुपये बताई गई है। ईडी इस प्रकरण में पहले भी कई लोगों से पूछताछ और कार्रवाई कर चुकी है।

ईडी की जांच में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर से जुड़े सिंडिकेट के माध्यम से कथित घोटाले को अंजाम दिया गया।

जांच एजेंसी के अनुसार, कारोबारी अनवर ढेबर ने कथित सिंडिकेट के गठन के लिए फरवरी 2019 में जेल रोड स्थित होटल वेनिंगटन में प्रदेश के तीन डिस्टलरी मालिकों को बुलाया था। बैठक में छत्तीसगढ़ डिस्टलरी से नवीन केडिया, भाटिया वाइंस प्राइवेट लिमिटेड से भूपेंदर पाल सिंह भाटिया और प्रिंस भाटिया शामिल हुए थे।

इसके अलावा वेलकम डिस्टलरी से राजेंद्र जायसवाल उर्फ चुन्नू जायसवाल के साथ हीरालाल जायसवाल और नवीन केडिया के संपर्क अधिकारी संजय फतेहपुरिया भी बैठक में पहुंचे थे। एजेंसी के अनुसार, बैठक में एपी त्रिपाठी और अरविंद सिंह भी मौजूद थे।

जांच एजेंसी का आरोप है कि बैठक में अनवर ढेबर ने डिस्टलरी से आपूर्ति होने वाली शराब पर प्रति पेटी कमीशन देने की व्यवस्था तय की और इसके बदले डिस्टलरी संचालकों को दर बढ़ाने का आश्वासन दिया गया। कथित तौर पर रकम का हिसाब-किताब रखने के लिए पूरे कारोबार को ए, बी और सी पार्ट में बांटा गया था।

ईओडब्ल्यू के मुताबिक विदेशी शराब पर कथित सिंडिकेट द्वारा लिए गए कमीशन का भी विश्लेषण किया जा रहा है। मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, अरुणपति त्रिपाठी, अरविंद सिंह, अनवर ढेबर, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, अनुराग द्विवेदी, अमित सिंह, दीपक दुआरी, दिलीप टुटेजा और सुनील दत्त समेत 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें कई आरोपी जमानत पर बाहर हैं।

रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ ईडी की धनशोधन जांच जारी है। अब विशेष पीएमएलए अदालत से उनकी जमानत याचिका खारिज होने के बाद फिलहाल उन्हें इस मामले में राहत नहीं मिली है।

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