रायपुर , अप्रैल 08 -- छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने बुधवार को रायपुर की विशेष अदालत में 1500 पन्नों का आठवां पूरक चालान प्रस्तुत किया है। इसी के साथ मामले में जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपसचिव रही सौम्या चौरसिया और तांत्रिक कृष्ण कुमार (केके) श्रीवास्तव को जमानत के आधार पर रिहाई मिल गई है।
जानकारी के अनुसार, सौम्या चौरसिया को एक माह पूर्व उच्च न्यायालय से सशर्त जमानत मिली थी। अदालत ने निर्देश दिया था कि संबंधित प्रकरण में चालान पेश किए जाने के दिन उनकी रिहाई सुनिश्चित की जाए। आज पूरक चालान दाखिल होने के बाद उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई।
ईओडब्ल्यू द्वारा प्रस्तुत पूरक चालान में घोटाले से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय लेन-देन और विभिन्न आरोपियों की भूमिकाओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी अब तक इस मामले में 51 आरोपियों के विरुद्ध अभियोग पत्र प्रस्तुत कर चुकी है।
जांच में देवेंद्र डडसेना की भूमिका को अवैध धन के प्रबंधन और लेन देन से जुड़ा बताया गया है। ईओडब्ल्यू के अनुसार, डडसेना ने विभिन्न स्रोतों से प्राप्त राशि को सुरक्षित रखने और निर्देशानुसार आगे प्रेषित करने में सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे कथित सिंडिकेट को सहयोग मिला।
कृष्ण कुमार (केके) श्रीवास्तव पर आरोप है कि उन्होंने अवैध उगाही तंत्र के तहत नकदी के संग्रहण, परिवहन, प्रबंधन और निवेश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एजेंसी का दावा है कि उन्होंने अपने प्रभाव का उपयोग कर अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया।
सौम्या चौरसिया पर आरोप है कि उन्होंने अपने शासकीय पद का दुरुपयोग करते हुए कथित सिंडिकेट को संरक्षण, समन्वय और प्रशासनिक सहायता प्रदान की, जिससे शासन को राजस्व की हानि हुई।
जेल से रिहा होने के बाद केके श्रीवास्तव ने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनके विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से व्यक्तिगत संबंध रहे हैं, लेकिन वे किसी दल से जुड़े नहीं हैं। धार्मिक आचरण को लेकर उन्होंने कहा कि पूजा-पाठ करना गलत नहीं है और उन्हें किसी कार्रवाई की चिंता नहीं है।
ईओडब्ल्यू ने स्पष्ट किया है कि मामले में अन्य शासकीय, अशासकीय एवं राजनीतिक व्यक्तियों, साथ ही संबंधित संस्थाओं और कंपनियों की जांच जारी है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे भी पूरक चालान न्यायालय में प्रस्तुत किए जाएंगे।
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