रायपुर , अगस्त 02 -- छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले की जांच कर रही आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने जांच के सिलसिले में एक और महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए लॉकडाउन अवधि में कथित तौर पर अवैध शराब के परिवहन में इस्तेमाल किए गए ट्रक को जब्त कर लिया है।

जांच एजेंसी से रविवार को प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह ट्रक एक उद्योग के नाम पर पंजीकृत है जिसका प्रोपराइटर मित्तल नामक कारोबारी हैं। एजेंसी का दावा है कि अनवर ढेबर के निर्देश पर इसी वाहन के जरिए एमवी डिस्टलरीज से शराब विभिन्न होटलों और बार तक पहुंचाई गई थी।

जांच एजेंसी ने बताया कि जांच के दौरान पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि मार्च और अप्रैल 2020 के लॉकडाउन के दौरान एमवी डिस्टलरीज से लगभग 8,400 पेटी शराब का अवैध परिवहन और विक्रय किया गया। एजेंसी का आरोप है कि पूरे नेटवर्क का संचालन अनवर ढेबर के निर्देश पर किया गया। इसी क्रम में एक अगस्त 2026 को उक्त ट्रक को जब्त किया गया।

जांच एजेंसी के अनुसार, अब तक इस मामले में 24 वाहनों की जब्ती की जा चुकी है। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि लॉकडाउन के दौरान निम्न गुणवत्ता की शराब का निर्माण किया गया था, जिसे बाद में पीने योग्य नहीं बताते हुए नष्ट कर दिया गया।

एजेंसी ने बताया कि कुछ अन्य वाहनों के उपयोग की भी जानकारी मिली है। इनमें से कई वाहन बेचे जा चुके हैं अथवा अन्य कार्यों में इस्तेमाल हो रहे हैं। ऐसे वाहनों के स्वामित्व और उपयोग की अलग से जांच की जा रही है।

इस बीच जांच एजेंसी ने छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से नियुक्त नोडल ऑडिट फर्म पीएसएसी एंड एसोसिएट्स के मोतीलाल नेहरू नगर (पूर्व), भिलाई स्थित कार्यालय में भी तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान ऑडिट से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए।

ईओडब्ल्यू का कहना है कि ऑडिट के दौरान कई शराब दुकानों की जांच नहीं होने दी गई, जिससे कथित अवैध शराब बिक्री के नेटवर्क पर प्रभाव नहीं पड़े। एजेंसी ने कहा कि मामले में आगे की जांच और वैधानिक कार्रवाई जारी है।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी कर रहा है। ईडी की शिकायत पर एसीबी में दर्ज प्राथमिकी में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का उल्लेख किया गया है।

ईडी ने अपनी जांच में दावा किया है कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी एपी त्रिपाठी तथा कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के माध्यम से कथित घोटाले को अंजाम दिया गया।

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