रायपुर , जुलाई 16 -- छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान फर्जी ग्रामसभा प्रस्तावों के आधार पर उद्योग स्थापना, ज्ञान भारतम् अभियान के अंतर्गत ऐतिहासिक ताम्रपत्रों के सत्यापन, नवा रायपुर के सेवाग्राम परियोजना, खाद वितरण व्यवस्था तथा मत्स्य नीति की विसंगतियों सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।

मंत्री राजेश अग्रवाल, रामविचार नेताम और ओपी चौधरी ने सदस्यों के प्रश्नों का उत्तर दिया, जबकि कुछ मामलों में सरकार ने जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। फर्जी ग्रामसभा प्रस्तावों के मामले में मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट भी किया।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ग्राम अल्दा तथा देवरी-घुलघुल में उद्योग स्थापना के लिए कथित फर्जी ग्रामसभा प्रस्तावों का मुद्दा उठाते हुए दोषियों पर कार्रवाई और कंपनियों को आवंटित भूमि निरस्त करने की मांग की। सरकार ने कहा कि संबंधित कंपनियों ने छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल से जल एवं वायु अधिनियम के तहत सहमति के लिए आवेदन ही प्रस्तुत नहीं किया, इसलिए मंडल को ग्रामसभा प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुए।

सरकार ने सदन को बताया कि ग्राम अल्दा के मामले में जालसाजी की शिकायत की जांच त्रि-सदस्यीय समिति ने की थी। जांच में पाया गया कि ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं देने का प्रस्ताव पारित किया था, जबकि कार्यवाही पंजी की अंतिम दो पंक्तियां किसने लिखीं, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। जांच प्रतिवेदन के आधार पर 22 जून 2026 को थाना तिल्दा-नेवरा में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने संबंधित परियोजनाओं को अभी पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं दी है।

श्री बघेल ने पूछा कि क्या सरपंच-सचिव के खिलाफ कार्रवाई होगी तथा बालाजी स्पंज एंड आयरन लिमिटेड और अग्रसेन स्टील एंड पावर प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित भूमि निरस्त की जाएगी। पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि पुलिस विवेचना जारी है तथा जांच के निष्कर्षों के आधार पर दोषियों एवं कंपनियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन से बहिर्गमन किया।

प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने ज्ञान भारतम् अभियान के तहत प्राचीन पांडुलिपियों एवं ऐतिहासिक ताम्रपत्रों के सत्यापन का मुद्दा उठाया। उन्होंने मल्हार से प्राप्त बालार्जुन ताम्रपट्टिका का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने 'मन की बात' में इसे ब्राह्मी और पाली भाषा में लिखा बताया था, जबकि विभागीय उत्तर में इसे पेटिकाशीर्ष ब्राह्मी लिपि और संस्कृत भाषा का बताया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों द्वारा गलत तथ्य प्रस्तुत कर मंत्री से गलत जवाब दिलवाया गया और ऐसे अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की।

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि यदि इस मामले में किसी अधिकारी की भूमिका पाई जाती है तो जांच कर उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि ज्ञान भारतम् अभियान के तहत राज्य से मोबाइल ऐप के माध्यम से 1,24,422 पांडुलिपियां पंजीकृत की गईं, जिनमें से 12,040 का नयी दिल्ली स्थित ज्ञानभारतम केंद्र द्वारा सत्यापन किया गया, जबकि 1,12,382 पांडुलिपियां तकनीकी अथवा अन्य कारणों से अस्वीकृत हुईं। मंत्री ने कहा कि मल्हार से वर्ष 1987 में प्राप्त बालार्जुन ताम्रपट्टिका की लिपि पेटिकाशीर्ष ब्राह्मी तथा भाषा संस्कृत है और यह वर्तमान में मल्हार निवासी संजीव पाण्डेय के आधिपत्य में सुरक्षित है।

नवा रायपुर स्थित सेवाग्राम परियोजना को लेकर भी सदन में तीखी बहस हुई। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने परियोजना पर हुए खर्च को लेकर सवाल उठाते हुए इसे "एक व्यक्ति विशेष की स्वेच्छाचारिता" का परिणाम बताया, जिस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि सेवाग्राम परियोजना का निर्णय 10 मार्च 2022 को लिया गया था, जिसका उद्देश्य महात्मा गांधी के आत्मनिर्भर ग्राम की अवधारणा को साकार करना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना तथा कारीगरों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक परियोजना के लिए 129 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया। मल्टीपरपज डाइनिंग हॉल, सामुदायिक किचन एवं प्रसाधन कक्ष पर 3.72 करोड़ रुपये तथा अन्य निर्माण कार्यों पर 104.05 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं। सभी निर्माण कार्य पूर्ण हो चुके हैं, हालांकि संचालन के लिए अलग से कोई सेटअप स्वीकृत नहीं किया गया है।

अजय चंद्राकर की टिप्पणी पर सदन में तीखी बहस हुई। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को आहत करना नहीं था तथा यदि भूपेश बघेल की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं।

विधायक दलेश्वर साहू ने सहकारी एवं निजी क्षेत्र में खाद वितरण के अनुपात को लेकर सरकार से सवाल किया। उन्होंने कहा कि उर्वरक आबंटन में सहकारिता को 48 प्रतिशत और निजी क्षेत्र को 52 प्रतिशत दर्शाया गया है, जबकि उत्तर में 70 प्रतिशत का उल्लेख है। इस विरोधाभास पर उन्होंने स्पष्टीकरण मांगा।

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