रायपुर , जुलाई 17 -- छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा द्वारा माओवादी हिडमा के संदर्भ में राहुल गांधी का उल्लेख किए जाने पर कांग्रेस सदस्यों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने राहुल गांधी द्वारा कथित रूप से हिडमा के समर्थन वाली पोस्ट को रिपोस्ट किए जाने का प्रमाण मांगा। इस दौरान सत्ता पक्ष ने देवेंद्र यादव की बॉडी-लैंग्वेज पर आपत्ति जताई। बढ़ते हंगामे के बीच अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करते हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत को अपने ही सदस्यों से हाथ उठवाकर समर्थन लेना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार में टीएस सिंहदेव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पंचायत विभाग छोड़ दिया था क्योंकि उनकी बात नहीं सुनी जा रही थी और वे आवास निर्माण कराना चाहते थे, लेकिन उन्हें रोका जा रहा था।
मंत्री शर्मा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने सत्ता में आते ही गरीबों को 18 लाख प्रधानमंत्री आवास देने का वादा पूरा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने सर्वे के बाद केवल 24 हजार प्रधानमंत्री आवास देने की बात कही और उन्हें भी मुख्यमंत्री के नाम से दिया गया तथा वह भी पूरी तरह उपलब्ध नहीं कराए गए। उन्होंने कहा कि "मोर आवास, मोर अधिकार" आंदोलन के बाद चुनाव से पहले केवल एक लाख हितग्राहियों को पहली किश्त जारी की गई थी।
उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार में प्रधानमंत्री आवास योजना तेजी से आगे बढ़ रही है और 11 लाख आवास बन गया है और रोज 1500 आवास बन रहा है। उन्होंने डीएमएफ, पीएससी और कोयला मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान हुए कथित घोटालों और नीतिगत त्रुटियों को वर्तमान सरकार सुधार रही है।
गृह मंत्री ने कहा कि "घुसपैठियों की बात हो, धर्मांतरण का विषय हो, या नक्सलवाद का विषय विपक्ष चर्चा से पलायन कर जाता है।" उन्होंने बलौदाबाजार प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि आरोप पत्र में इसे सतनामी समाज से जोड़ना उचित नहीं है और उसमें यह उल्लेख होना चाहिए कि यह असामाजिक तत्वों का कृत्य था।
इस टिप्पणी के बाद विपक्ष ने आरोप लगाया कि बलौदाबाजार मामले में चुन-चुनकर सतनामी समाज के लोगों को गिरफ्तार किया गया। जवाब में श्री शर्मा ने कहा कि कार्रवाई केवल असामाजिक तत्वों पर की गई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार नक्सल पीड़ितों को राहत देने और जेलों में बंद लोगों के मामलों के समाधान की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति स्थापित करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और यदि कांग्रेस सरकार ने पहले केंद्र का सहयोग किया होता तो नक्सलवाद पहले ही समाप्त हो सकता था। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
चर्चा में भाग लेते हुए कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि "छत्तीसगढ़ में अब तक जितने भी अविश्वास प्रस्ताव आए हैं उनमें यह सबसे लचर, दिशाहीन, कमजोर और औचित्यहीन अविश्वास प्रस्ताव है इसलिए मैं इसका पुरजोर विरोध करता हूं।"उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा, "हमने औरों की भी फिक्र की, तुम अपनों की भी न निभा सके।" साथ ही शायराना अंदाज में कहा, "दोस्ती तुम्हारे बस की नहीं कम से कम दुश्मनी तो निभा लेते, सौ झूठ बोला तुमने एक सच तो बता देते।"मंत्री नेताम ने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल सुर्खियां बटोरना चाहता है, चाहे कुर्ता फाड़कर या हिडमा को हीरो बताकर। उन्होंने कहा कि आदिवासी और अनुसूचित जाति वर्ग के नेताओं के महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचने से विपक्ष असहज है।
इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने मंत्री पर जातीय आधार पर बयानबाजी करने का आरोप लगाया और कहा कि अविश्वास प्रस्ताव किसी व्यक्ति, मंत्री या जाति के विरुद्ध नहीं बल्कि सरकार के कामकाज के खिलाफ लाया गया है।
मंत्री नेताम ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार ने अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का कार्य किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को "देव तुल्य" बताते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत को भी "देव के समान" बताया तथा तीनों नेताओं की तुलना "ब्रह्मा, विष्णु और महेश" से की। उन्होंने कहा कि ऐसे नेतृत्व के रहते अविश्वास प्रस्ताव का कोई औचित्य नहीं है।
उन्होंने अपने भाषण का समापन एक अन्य शेर से किया, "मैं तो रास्ते जा रहा था भेल-पूरी खा रहा था, सरकार के काम गिना रहा था, विपक्ष को मिर्ची लगी तो मैं क्या करूं।"वहीं, कांग्रेस विधायक कवासी लखमा ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद आदिवासी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जल, जंगल और जमीन की लड़ाई आज भी जारी है तथा बस्तर से सरगुजा तक आदिवासियों को जंगलों से बेदखल किए जाने की स्थिति बन रही है।
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