रायपुर , नवंबर 02 -- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित तीन दिवसीय राज्योत्सव 2026 का समापन मंगलवार, तीन नवंबर को नवा रायपुर अटल नगर स्थित राज्योत्सव मैदान में होगा। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रदेश की प्रतिभाओं को राज्य अलंकरण से सम्मानित किया जाएगा।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राज्योत्सव के अंतिम दिन राज्य अलंकरण समारोह के साथ लोककला, शास्त्रीय नृत्य और संगीत की विविध प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। मुख्य मंच पर शाम छह बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू होंगे। दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के कलाकार शाम छह से साढ़े छह बजे तक लोकसंगीत प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद शाम साढ़े छह से सात बजे तक पद्मश्री उषा बारले अपनी प्रस्तुति देंगी।

मुख्य मंच पर शाम सात बजे से रात नौ बजे तक राज्य अलंकरण समारोह आयोजित होगा। इसमें कला, संस्कृति, साहित्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा। समारोह के बाद रात नौ बजे से बॉलीवुड के प्रसिद्ध पार्श्व गायक अभिजीत भट्टाचार्य अपने लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति देंगे।

राज्योत्सव के अंतिम दिन शिल्पग्राम में भी सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित होंगी। दोपहर तीन बजे से शुरू होने वाले कार्यक्रमों में प्रदेश के विभिन्न जिलों के कलाकार कुल दस प्रस्तुतियां देंगे। इनमें पंथी नृत्य, आदिवासी लोकसंगीत, कथक, भजन, सूफी संगीत, लोकमंच और नाट्य विधाएं शामिल हैं।

शिल्पग्राम में रायपुर की आस्था भट्ट भजन गायन, दुर्ग की आरती बारले पंथी नृत्य और कबीरधाम के राकेश सेन लोकमंच की प्रस्तुति देंगे। इसके अलावा रायपुर के दिनेश कुमार जांगड़े पंथी नृत्य तथा पूर्णिमा साहू जसगीत एवं जगराता भजनों की प्रस्तुति देंगी।

इसी क्रम में अभिषेक सोनकर आदिवासी लोकसंगीत एवं नृत्य, दीपाली पाण्डेय कथक समूह नृत्य और अनुष्णा रॉय चौधरी कथक की प्रस्तुति देंगी। वृद्धुमन वचस्पति भारती सूफी संगीत तथा आनंदकुमार पाण्डेय नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि राज्योत्सव के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोककला, सांस्कृतिक परंपराओं और जनजातीय विरासत को व्यापक मंच उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आयोजन में राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों के साथ स्थानीय कलाकारों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जिससे प्रदेश की पारंपरिक कलाओं के संरक्षण और संवर्धन को प्रोत्साहन मिलेगा।

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