रायपुर , अक्टूबर 30 -- छत्तीसगढ़ में नक्सली गतिविधियों में आई कमी के मद्देनजर राज्य सरकार ने जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं को उपलब्ध कराई जा रही वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया है। प्रशासन से आज मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर हुई समीक्षा के बाद 40 नेताओं की सुरक्षा वापस लेने और 50 से अधिक नेताओं की सुरक्षा श्रेणी कम करने का निर्णय लिया गया है। इस कदम से लगभग 200 पुलिस जवान नियमित पुलिस बल में वापस आ सकेंगे।

प्रदेश में अब तक करीब 400 नेताओं की सुरक्षा में 1550 पुलिसकर्मी तैनात थे। वीआईपी सुरक्षा में पुलिस बल की तैनाती के मामले में छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर के बाद देश में दूसरे स्थान पर था। नक्सलवाद के प्रभाव में कमी आने के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में जवानों की तैनाती को लेकर सवाल उठ रहे थे, जिसके बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की।

समीक्षा के दौरान सुरक्षा प्राप्त नेताओं की मौजूदा श्रेणी और उन्हें उपलब्ध कराए गए पुलिस बल का आकलन किया गया। इसके आधार पर 40 नेताओं की सुरक्षा पूरी तरह समाप्त करने के आदेश जारी किए गए, जबकि 50 से अधिक नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में कटौती की गई है।

राज्य में अब तक 11 नेताओं को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी। नई व्यवस्था के तहत अब केवल मुख्यमंत्री और राज्यपाल को ही जेड प्लस सुरक्षा उपलब्ध रहेगी। केदार कश्यप, महेश गागड़ा, दीपक बैज और महेंद्र कर्मा के परिवारजन सहित अन्य नेताओं की सुरक्षा जेड प्लस से घटाकर जेड श्रेणी कर दी गई है।

जिन 40 नेताओं की सुरक्षा वापस ली गई है, उनमें बस्तर क्षेत्र के सरपंच, मंडल अध्यक्ष और दिवंगत नेताओं के परिजन शामिल हैं। इनमें अधिकांश को एक्स श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी। वहीं, सुरक्षा श्रेणी में कटौती का प्रभाव मुख्य रूप से जेड और वाई प्लस श्रेणी के सुरक्षा प्राप्त नेताओं पर पड़ा है।

इसी क्रम में कांकेर विधायक की सुरक्षा जेड श्रेणी से घटाकर वाई प्लस कर दी गई है। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और सांसद महेश कश्यप सहित कुछ नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

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