रायपुर , अप्रैल 22 -- छत्तीसगढ़ में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर उत्पन्न राजनीतिक परिस्थितियों के बीच राज्य सरकार ने 30 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव रखा है।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने जानकारी देते हुए कहा कि सत्र की अवधि का अंतिम निर्णय विधानसभा अध्यक्ष द्वारा किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिए कि अधिनियम के पारित न होने के मुद्दे पर विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया जा सकता है।
श्री साव ने विपक्षी दलों पर महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों को बाधित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार इस दिशा में लगातार प्रयासरत है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री श्री मोदी के खिलाफ कथित टिप्पणी को लेकर भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। श्री साव ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस प्रकार की भाषा लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है और इससे देश की भावनाएं आहत होती हैं।
बस्तर में सचिन तेंदुलकर के प्रस्तावित दौरे को लेकर उठे सुरक्षा सवालों पर उप मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर राजनीतिकरण का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तेंदुलकर का दौरा युवाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से है, जबकि विपक्ष अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहा है।
श्री साव ने धर्मांतरण के मुद्दे पर कहा कि राज्य सरकार ने इसे गंभीर चुनौती मानते हुए कानून को और सख्त बनाया है और इस दिशा में कार्रवाई तेज की गई है। उन्होंने समाज से भी सहयोग की अपील की।
कांग्रेस के पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने विशेष सत्र को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इस प्रकार के सत्र की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है और यदि सरकार ऐसा करती है तो विपक्ष को भी अपनी बात रखने का समान अवसर मिलना चाहिए।
श्री डहरिया ने केंद्र सरकार पर महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि पारित विधेयकों को लागू करना प्राथमिकता होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का आरोप लगाया।
उन्होंने बस्तर दौरे और सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि नक्सल समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है, जिससे कार्यक्रमों में बदलाव देखने को मिल रहा है।
कांग्रेस नेता इसके अलावा, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन को लेकर भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनसमस्याओं के निराकरण में अपेक्षित प्रगति नहीं हो पा रही है और सरकार केवल दिखावटी कदम उठा रही है।
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