रायपुर , अक्टूबर 10 -- छत्तीसगढ़ में भूमि पंजीयन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए लागू स्वचालित नामांतरण (ऑटोम्यूटेशन) व्यवस्था से नागरिकों को राहत मिल रही है। इस व्यवस्था के माध्यम से जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया में लगने वाले समय और कार्यालयों के चक्कर लगाने की परेशानी को कम किया जा रहा है।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम कोटकखर्रा निवासी मंगल सिंह सांडिया को इस नई व्यवस्था का लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि पहले जमीन की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण कराने के लिए कई महीनों तक इंतजार करना पड़ता था, लेकिन इस बार रजिस्ट्री के तुरंत बाद उनका नामांतरण पूरा हो गया। इससे उन्हें राजस्व और तहसील कार्यालयों की दौड़भाग से राहत मिली।

राज्य सरकार के सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पंजीयन विभाग से संवाद के दौरान सांडिया ने अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था से न केवल समय की बचत हुई, बल्कि संपत्ति से संबंधित आगे की प्रक्रियाएं पूरी करना भी आसान हो गया है।

आज मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में प्रदेश की पंजीयन सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और नागरिकों के अनुकूल बनाने के लिए तकनीकी सुधार किए जा रहे हैं। इसी क्रम में संपत्ति पंजीयन और नामांतरण की प्रक्रियाओं को आपस में जोड़ने के लिए स्वचालित नामांतरण व्यवस्था लागू की गई है।

इस व्यवस्था के अंतर्गत संपत्ति की रजिस्ट्री होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ती है। इससे पंजीयन और राजस्व विभाग के बीच समन्वय बेहतर होने के साथ अनावश्यक कार्यालयीन प्रक्रियाओं में कमी आ रही है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों और भूमि स्वामियों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।

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