चेन्नई/रायपुर , जुलाई 23 -- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र (सीओईआरएस) ने छत्तीसगढ़ सरकार के साथ राज्य में डेटा के आधार पर ड्रिवन हाइपरलोकल इंटरवेंशंस (डीडीएचआई) कार्यक्रम शुरू करने के लिए गुरुवार को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये।
यह समझौता रायपुर में सीओईआरएस के प्रमुख प्रो. वेंकटेश बालासुब्रमणियन और छत्तीसगढ़ सरकार के परिवहन विभाग के सचिव एवं आयुक्त एस. प्रकाश ने किया।
आईआईटी मद्रास ने बताया कि सीओईआरएस पहले से ही डीडीएचआई कार्यक्रम के तहत 17 राज्यों के साथ काम कर रहा है और अब इसका विस्तार छत्तीसगढ़ तक किया गया है। इस पहल का उद्देश्य आंकड़ों पर आधारित योजना, क्षमता निर्माण और लक्षित इंजीनियरिंग उपायों के माध्यम से जिला स्तर पर सड़क सुरक्षा को मजबूत करना है।
कार्यक्रम के तहत छत्तीसगढ़ के आदिवासी और खनन क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा संबंधी चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां भौगोलिक परिस्थितियों, यातायात व्यवस्था और आवागमन की जरूरतों के अनुरूप स्थानीय स्तर पर समाधान विकसित किये जाएंगे।
कार्यक्रम के पहले चरण में रायपुर, रायगढ़, सूरजपुर, बालोद, बलौदा बाजार, जशपुर, सरगुजा, महासमुंद और जांजगीर-चांपा सहित नौ जिलों का चयन किया गया है। इन जिलों में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा आकलन, इंजीनियरिंग एवं प्रशासनिक उपाय, क्षमता निर्माण कार्यक्रम तथा जिला एवं राज्य स्तरीय अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए सीओईआरएस तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा।
छत्तीसगढ़ के परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रत्येक सड़क दुर्घटना किसी परिवार के लिए अपूरणीय क्षति होती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल दुर्घटनाओं की संख्या कम करना नहीं, बल्कि ऐसी सुरक्षित सड़क व्यवस्था विकसित करना है जिससे प्रत्येक नागरिक सुरक्षित घर लौट सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह साझेदारी सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि ने कहा कि डीडीएचआई कार्यक्रम इस बात का उदाहरण है कि आईआईटी मद्रास और सरकारें मिलकर सामाजिक चुनौतियों का समाधान कैसे कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार के साथ साझेदारी के माध्यम से स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सड़क सुरक्षा उपाय विकसित किये जाएंगे।
सीओईआरएस के प्रमुख बालासुब्रमणियन ने कहा कि आदिवासी और खनन क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा की चुनौतियां देश के अन्य हिस्सों से अलग हैं। उन्होंने कहा कि डीडीएचआई के तहत स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समाधान तैयार किए गए हैं, न कि सभी क्षेत्रों के लिए एक समान मॉडल अपनाया गया है।
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