कोंडागांव , अप्रैल 06 -- छत्तीसगढ़ में लागू नक्सल पुनर्वास नीति अब जमीनी स्तर पर प्रभावी होती नजर आ रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित इस नीति के तहत कोंडागांव जिले में पुनर्वासित व्यक्तियों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस पहल की जा रही है। जिले में स्थापित पुनर्वास केन्द्र आज ऐसे लोगों के लिए नई उम्मीद और नवजीवन का केंद्र बन चुका है, जिन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और विकास का मार्ग अपनाया है।

जिले में स्थापित पुनर्वास केन्द्र आज ऐसे लोगों के लिए नई उम्मीद और नवजीवन का केंद्र बन चुका है, जिन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और विकास का मार्ग अपनाया है।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आविनाश भोई से मिली जानकारी के अनुसार जिले में वर्तमान में 48 पुनर्वासित व्यक्ति चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें राज्य शासन की विभिन्न योजनाओं से जोड़ा गया है। इन लोगों को न केवल आर्थिक और सामाजिक सहायता दी जा रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से व्यवस्थित कौशल प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है।

पुनर्वासित व्यक्तियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुरूप अलग-अलग ट्रेड में प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिनमें असिस्टेंट शटरिंग कारपेंटर, गार्डनर, वाहन मैकेनिक, इलेक्ट्रिशियन तथा सिलाई-कढ़ाई जैसे रोजगारोन्मुखी कौशल शामिल हैं।

प्रशासन के अनुसार प्रथम चरण में 38 पुनर्वासित व्यक्तियों को विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वहीं वर्तमान में लाईवलीहुड कॉलेज में 10 अन्य व्यक्तियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इनमें से 7 लोग सिलाई-कढ़ाई और 3 लोग इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल उन्हें तकनीकी दक्षता प्रदान कर रहा है, बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास और आत्मसम्मान भी विकसित कर रहा है, जो उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित कर रहा है।

पुनर्वास केन्द्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहीं मड़हो बाई कोर्राम और हाड़ोबाई सोड़ी ने बताया कि वे सिलाई-कढ़ाई का काम सीख रही हैं और प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद अपने गांव लौटकर स्वरोजगार शुरू करने की योजना बना रही हैं। उनका कहना है कि शासन की इस पहल से उन्हें जीवन में आगे बढ़ने का नया अवसर मिला है। इसी तरह मोहन कोर्राम, जो वर्ष 2004 में माओवादी संगठन से जुड़े थे, अब पुनर्वास नीति के तहत सिलाई का प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे इस हुनर के माध्यम से अपने गांव में रोजगार स्थापित कर शांतिपूर्ण जीवन जीना चाहते हैं।

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