रायपुर , अक्टूबर 09 -- नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (डीएमईओ) की महानिदेशक निधि छिब्बर ने छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग की कार्यप्रणाली और योजनाओं के मूल्यांकन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए राज्य में मजबूत एवं स्थायी निगरानी तंत्र विकसित करने के लिए तकनीकी और संस्थागत सहयोग देने का आश्वासन दिया है।

राजधानी रायपुर में शुक्रवार को राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में स्टेट सपोर्ट मिशन के अंतर्गत संचालित गतिविधियों, प्रस्तावित कार्ययोजनाओं और अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की गई।

सुश्री छिब्बर ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ ने कम समय में योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना की सफलता का आकलन केवल उसके क्रियान्वयन से नहीं, बल्कि लक्षित हितग्राहियों तक पहुंचने वाले वास्तविक लाभ और प्राप्त परिणामों के आधार पर किया जाना चाहिए। इसके लिए संस्थागत स्तर पर स्थायी निगरानी एवं मूल्यांकन व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है।

राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने की दिशा में आयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अंजोर विजन-2047 के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आंकड़ों पर आधारित नीति निर्माण, विभागीय समन्वय और योजनाओं के प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि राज्य नीति आयोग एक परामर्शदात्री एवं ज्ञान आधारित संस्था के रूप में कार्य करते हुए विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुखी बनाने के प्रयास कर रहा है। इसका उद्देश्य योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।

बैठक में योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव भुवनेश यादव ने बताया कि योजनाओं के मूल्यांकन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) रायपुर और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई की विशेषज्ञता का सहयोग लिया जा रहा है। इससे शोध आधारित अध्ययन, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग बढ़ेगा।

अधिकारियों ने बताया कि राज्य में डीएमईओ के आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क और डेटा गवर्नेंस क्वालिटी इंडेक्स को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाया गया है। विभिन्न शासकीय योजनाओं के प्रायोगिक मूल्यांकन के साथ नौ प्राथमिक क्षेत्रों में त्वरित अध्ययन किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त अंजोर विजन-2047 के लक्ष्यों की प्रगति की निगरानी के लिए विशेष पोर्टल विकसित करने की प्रक्रिया जारी है।

बैठक में बताया गया कि राज्य नीति आयोग संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के सहयोग से बाल कल्याण सूचकांक विकसित कर रहा है। इसके माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और समग्र विकास से संबंधित सेवाओं की उपलब्धता तथा उनके वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जाएगा। इस पहल से उन जिलों और क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता मिलेगी, जहां बच्चों के कल्याण के लिए अतिरिक्त संसाधन और विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

इसके साथ ही सतत विकास लक्ष्यों की प्रगति की निगरानी के लिए राज्य एवं जिला स्तरीय व्यवस्था विकसित की गई है। आयोग द्वारा प्रतिवर्ष प्रगति प्रतिवेदन जारी किए जा रहे हैं तथा जिलों में नियमित समीक्षा के लिए विशेष डैशबोर्ड तैयार किया गया है।

राज्य में सतत विकास लक्ष्यों के आधार पर बजट विश्लेषण की पहल भी की जा रही है। इसके जरिए विभिन्न विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में सरकारी व्यय के योगदान का आकलन किया जाएगा। भविष्य में इन निष्कर्षों को बजट निर्माण प्रक्रिया में चरणबद्ध तरीके से शामिल कर परिणाम आधारित बजट व्यवस्था को बढ़ावा देने की योजना है।

सुश्री छिब्बर ने कहा कि प्रभावी निगरानी व्यवस्था से योजनाओं की कमियों की समय रहते पहचान करने और आवश्यक सुधार लागू करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप मूल्यांकन प्रणाली को और सुदृढ़ बनाने के लिए डीएमईओ की ओर से हरसंभव सहयोग देने की प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक में आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के संचालक तीर्थराज अग्रवाल सहित राज्य नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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