रायपुर , अप्रैल 15 -- ) छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर मसौदा के निर्माण के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने के सरकार के फैसले को लेकर राजनीति तेज हो गयी है।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में आज यह फैसला लिया गया। समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई करेंगी, जबकि इसके अन्य सदस्यों के मनोनयन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया है।

सरकार के इस निर्णय के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस पहल का विरोध करते हुए इसे आदिवासी हितों के खिलाफ बताया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा, "यूसीसी के लिए कमेटी बनाने का निर्णय लिया है, कांग्रेस पार्टी इसका विरोध करती है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) यूसीसी लागू करती है तो आदिवासियों के अधिकारों का हनन कर रही है। आदिवासियों के अधिकारों को यह समाप्त करना चाहती है। आदिवासी वर्ग ऐसा है जो सीधे-सीधे सरकार से विशेष संरक्षण प्राप्त है। आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को पावर दिया गया है।"उन्होंने कहा, "क्या सरकार यूसीसी लागू कर आदिवासियों को प्राप्त अधिकारों को छीनना चाहती है? इसका मतलब है कि आदिवासी क्षेत्रों में खनिज संसाधनों को छीनने के लिए यूसीसी लागू करना चाह रही है। यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"श्री बैज ने सरकार से कई सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा, "क्या यूसीसी लागू होने के बाद प्रदेश में पेसा कानून का अस्तित्व यथावत रहेगा? पांचवी अनुसूची की पंचायतों के अधिकारों में कोई छोड़छाड़ नहीं होगी? राज्य की संरक्षित जनजातियां बैगा, कमार, पहाड़ी, कोरवा, बिरहोर, अबुझमाड़िया, भुंजिया, पांडा को संविधान में विशेष संरक्षण मिला है क्या यूसीसी लागू होने पर इनके अधिकार सुरक्षित रहेंगे? आदिवासियों की जमीनों पर उनके सामुदायिक अधिकारों का हनन नहीं किया जाएगा?"इस बीच, राज्य सरकार का कहना है कि वर्तमान में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण जैसे पारिवारिक मामलों में अलग-अलग धर्मों के अनुसार अलग कानून लागू हैं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में असमानता और जटिलता उत्पन्न होती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में प्रयास करने का निर्देश दिया गया है।

सरकार के अनुसार प्रस्तावित समिति राज्यभर से नागरिकों, संगठनों और विषय विशेषज्ञों से सुझाव लेकर यूसीसी का प्रारूप तैयार करेगी। इसके लिए वेब पोर्टल के माध्यम से भी सुझाव आमंत्रित किए जा सकते हैं। समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार ड्राफ्ट को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।

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