रायपुर , अक्टूबर 18 -- छत्तीसगढ़ में बलरामपुर जिले के चलगली क्षेत्र में मोरन नदी पर 5.91 करोड़ रुपये की लागत से उच्चस्तरीय पुल का निर्माण किया जाएगा। इसके बनने से क्षेत्र के 12 से 15 गांवों के लगभग 15 से 20 हजार ग्रामीणों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलेगी। साथ ही जिला मुख्यालय बलरामपुर की दूरी करीब 15 किलोमीटर कम हो जाएगी।

प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री रामविचार नेताम ने रविवार को महाअष्टमी के अवसर पर ग्राम कपिलदेवपुर में कपिलदेवपुर-बसेरा मार्ग पर प्रस्तावित उच्चस्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग का भूमिपूजन किया। इस परियोजना के लिए 591.04 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग के सेतु संभाग, अंबिकापुर द्वारा कराया जाएगा।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार मोरन नदी पर प्रस्तावित पुल की लंबाई 144 मीटर और चौड़ाई 8.40 मीटर होगी। इसमें 24-24 मीटर के छह स्पैन बनाए जाएंगे। पुल की मजबूती के लिए पाइल फाउंडेशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसके अतिरिक्त दोनों छोरों पर कुल 271 मीटर लंबे पहुंच मार्ग का निर्माण भी किया जाएगा।

इस अवसर पर मंत्री नेताम ने कहा कि पुल के अभाव में चलगली क्षेत्र के ग्रामीणों को लंबे समय से आवागमन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। पुल का निर्माण पूरा होने के बाद ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में सुविधा होगी।

उन्होंने बताया कि चलगली से रामानुजगंज सड़क निर्माण को भी स्वीकृति मिल चुकी है। निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसका निर्माण शुरू किया जाएगा। इसके अलावा चलगली को बलरामपुर और वाड्रफनगर से बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

श्री नेताम ने कहा कि ग्रामीण अधोसंरचना का विकास राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। गांवों में सीमेंट-कंक्रीट सड़कों, विद्यालयों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय और मुक्तिधाम सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने महतारी वंदन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। उन्होंने किसानों से आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां अपनाने के साथ दुग्ध उत्पादन और पशुपालन को आय के अतिरिक्त साधन के रूप में विकसित करने का आह्वान किया।

मंत्री ने स्व-सहायता समूहों के माध्यम से सब्जी उत्पादन, मुर्गीपालन, बकरीपालन और ड्रोन दीदी जैसी गतिविधियों से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही महिलाओं के प्रयासों की सराहना भी की।

कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, संबंधित विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

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