रायपुर , अक्टूबर 19 -- छत्तीसगढ़ में सोमवार, 19 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि की महाष्टमी और नवमी तिथि का संयोग है। प्रदेश भर के प्रमुख शक्तिपीठों और देवी मंदिरों में आज सुबह से ही दर्शन-पूजन के इच्छुक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। डोंगरगढ़ के मां बम्लेश्वरी मंदिर, बिलासपुर जिले के रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर तथा रायपुर के मां महामाया मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी हुई हैं।
पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि आज सुबह 10:51 बजे तक रही, जिसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ हो गई। उदया तिथि के आधार पर आज महाष्टमी भी मनाई जा रही है। इस अवसर पर श्रद्धालु मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं। भक्त माता को चुनरी, नारियल और फूल अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना कर रहे हैं।
रायपुर के पंडित शिरीष कुमार मिश्रा के अनुसार, शहर के करीब 90 प्रतिशत दुर्गा पूजा पंडालों में हवन संपन्न हो चुका है। शहर के मां महामाया मंदिर में भी सुबह से श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने पुरानी बस्ती स्थित मां महामाया मंदिर में दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और माता का आशीर्वाद लिया।
रतनपुर के मां महामाया मंदिर में नवरात्र के दौरान पूजा-पाठ एवं धार्मिक अनुष्ठान जारी रहे और हवन संपन्न हुआ। मंदिर परिसर में सुबह से ही माता के दर्शनार्थ श्रद्धालु पहुंचते रहे।
अंबिकापुर के महामाया मंदिर में भी अष्टमी के दिन सुबह से दर्शनार्थियों की लंबी कतार लगी रही। परंपरा के अनुसार राजपरिवार के मुखिया टीएस सिंहदेव ने मंदिर में संधि पूजा की। भीड़ प्रबंधन के लिए मंदिर परिसर में पुलिस बल तैनात किया गया है।
रामानुजगंज में दुर्गा पूजा पंडालों के पट खुलते ही माता के दर्शन के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। आकर्षक पंडालों और रोशनी से सजा नगर भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है।
रायगढ़ में नवमी पर बूढ़ी माई और बंजारी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचने लगे। भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मनोकामनाएं मांगीं, जबकि कई परिवारों ने घरों में नवकन्या पूजन किया। शहर के देवी मंदिरों सहित अन्य स्थानों पर भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा।
मां महामाया मंदिर में मंगलवार को कन्या भोज और ब्राह्मण भोज के साथ नौ दिवसीय नवरात्र अनुष्ठान का समापन होगा। इस अवसर पर मां महामाया का हीरे जड़ित स्वर्ण आभूषणों से राजसी श्रृंगार किया जाएगा।
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