रायपुर , जुलाई 22 -- छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के बाल चौपाल 2.0 अभियान के तहत रायपुर जिले के तिल्दा विकासखंड स्थित ग्राम सिनोधा में दो भाइयों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में सफलता मिली है।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में आयोजित बाल चौपाल 2.0 के दौरान बच्चों ने खुलकर अपनी समस्याएं साझा कीं। इसी दौरान बच्चों ने बताया कि उनका एक मेधावी मित्र पारिवारिक परिस्थितियों के कारण पिछले करीब दो वर्षों से बाल श्रम करने को विवश है और इसी वजह से उसकी पढ़ाई छूट गई है।
इस जानकारी को गंभीरता से लेते हुए डॉ. शर्मा ने बाल चौपाल के बाद संबंधित क्षेत्र का दौरा कर बालक और उसके परिजनों से मुलाकात की तथा उनकी परिस्थितियों की जानकारी ली। इसके बाद आयोग ने स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायत के समन्वय से आवश्यक पहल की।
आयोग की सक्रिय पहल और ग्राम पंचायत के सहयोग से संबंधित बालक तथा उसके बड़े भाई, जो दूसरे स्थान पर कार्यरत थे, दोनों का पुनः विद्यालय में प्रवेश सुनिश्चित कराया गया। वर्तमान में दोनों बच्चे नियमित रूप से विद्यालय जाकर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
डॉ. शर्मा ने कहा कि बाल चौपाल 2.0 का उद्देश्य केवल बच्चों की समस्याएं सुनना नहीं, बल्कि उनका समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि आयोग "समस्या से संवाद, संवाद से समाधान" की कार्यसंस्कृति के तहत प्रत्येक बच्चे को उसके अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार यह अभियान बच्चों के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बन रहा है।
आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी बच्चे के बाल श्रम में संलिप्त होने, शिक्षा से वंचित होने अथवा बाल अधिकारों के उल्लंघन की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित प्रशासन या आयोग को दें, ताकि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और शिक्षित भविष्य उपलब्ध कराया जा सके।
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