रायपुर , सितंबर 07 -- छत्तीसगढ़ में वाहन चालकों के लंबित ई-चालान अब उनके वाहन और ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित विभिन्न सेवाओं पर असर डाल सकते हैं। ई-चालान का भुगतान लंबित होने की स्थिति में आरसी, फिटनेस, परमिट और ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े कई कार्य प्रभावित हो सकते हैं। राजधानी रायपुर में पुराने और नए मामलों को मिलाकर सवा लाख से अधिक ई-चालान लंबित बताए जा रहे हैं, जिनमें करीब 96,800 चालान कोर्ट में लंबित हैं।

लंबित ई-चालान मामलों के निराकरण के लिए 12 सितंबर को लोक अदालत आयोजित की जाएगी। वाहन चालक इस दौरान अपने लंबित चालानों का निपटारा करा सकेंगे। इसके लिए पंजीयन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इच्छुक वाहन चालकों को गुरुवार तक पंजीयन कराना होगा।

लोक अदालत में प्रकरणों का समाधान दोनों पक्षों की आपसी सहमति के आधार पर किया जाता है। इसका उद्देश्य लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत देते हुए मामलों का शीघ्र निराकरण करना है। ई-चालान से संबंधित लंबित मामलों में भी वाहन मालिक इस व्यवस्था का लाभ ले सकते हैं।

कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 22 ए और 22 बी के तहत सार्वजनिक उपयोग से जुड़ी सेवाओं के विवादों के समाधान के लिए स्थायी लोक अदालतों का प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ में बिलासपुर, रायपुर और जगदलपुर में वर्ष 2007 से स्थायी लोक अदालतें संचालित हैं, जबकि दुर्ग और सरगुजा के अंबिकापुर में वर्ष 2011 से इनका संचालन किया जा रहा है।

स्थायी लोक अदालतों में परिवहन के साथ ही डाक, टेलीफोन, बिजली-पानी की आपूर्ति, सार्वजनिक सफाई, अस्पताल, बीमा, बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से संबंधित विवादों का निराकरण किया जाता है। इसके अलावा ईंधन आपूर्ति, शिक्षण संस्थानों, आवास और रियल एस्टेट जैसी सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े मामलों में भी सुनवाई और समाधान की व्यवस्था है।

राष्ट्रीय लोक अदालतों का आयोजन निर्धारित तारीखों पर देशभर में किया जाता है। इनमें सुप्रीम कोर्ट से लेकर जिला और तालुका स्तर की अदालतों में लंबित मामलों को आपसी सहमति के जरिए सुलझाने का प्रयास किया जाता है। इसका उद्देश्य एक ही दिन में अधिक संख्या में प्रकरणों का निराकरण कर पक्षकारों को शीघ्र न्याय उपलब्ध कराना है।

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