रायपुर , अक्टूबर 31 -- छत्तीसगढ़ में तूफान 'अर्नब' का प्रभाव अब कमजोर पड़ने लगा है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के दौरान प्रदेश के अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होने की संभावना जताई है। हालांकि, राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने का खतरा अभी बना हुआ है। दूसरी ओर, लगातार हुई बारिश से धान उत्पादक किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विशेषकर बेमेतरा जिले में कटाई के लिए तैयार फसल को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं।

मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई, जबकि कुछ स्थानों पर भारी बारिश हुई। उत्तरी छत्तीसगढ़ और उससे सटे मध्यप्रदेश के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय है, जिसके प्रभाव से राज्य में वर्षा की गतिविधियां बनी हुई हैं। इसके अतिरिक्त दक्षिणी अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार के आसपास भी एक अन्य कम दबाव का क्षेत्र विकसित हुआ है।

मौसम विभाग ने शनिवार को प्रदेश के कुछ स्थानों पर बारिश की संभावना व्यक्त की है। इस दौरान एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी भी जारी की गई है। अगले दो दिनों के बाद भी प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में बिजली गिरने की आशंका बनी रह सकती है।

इस बीच, बेमेतरा जिले में पिछले दो दिनों से जारी बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में कटाई के लिए तैयार धान की फसल भीग गई है, जबकि कई स्थानों पर तेज हवा और बारिश के कारण खड़ी फसल जमीन पर गिर गई है। खेतों में जलभराव और अत्यधिक नमी के चलते धान की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

प्रभावित किसान ओम वर्मा के मुताबिक, उनकी 25 से 30प्रतिशत फसल खराब हो चुकी है। बारिश जारी रही तो नुकसान 50 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। खेतों में पानी जमा होने से धान के दानों के काले पड़ने, सड़ने और अंकुरित होने का खतरा बढ़ गया है। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से फसल क्षति का सर्वेक्षण कराकर उचित मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है।

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