रायपुर , अक्टूबर 30 -- छत्तीसगढ़ में बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का प्रभाव अब धीरे-धीरे कम होने की संभावना है। तूफान का शेष हिस्सा कमजोर होकर निम्न दबाव के क्षेत्र में परिवर्तित हो चुका है और उत्तर-उत्तरपूर्व दिशा की ओर बढ़ रहा है।
मौसम विभाग से शुक्रवार को मिली जानकारी के अनुसार अगले 24 घंटे के दौरान इसके और कमजोर होकर उत्तरी छत्तीसगढ़ के ऊपर निम्न दबाव के क्षेत्र के रूप में बने रहने की संभावना है। इसके प्रभाव से प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आएगी। हालांकि रायगढ़ सहित कई इलाकों में बारिश का दौर जारी है।
चक्रवात के प्रभाव से सरगुजा और रायपुर संभाग के विभिन्न क्षेत्रों में गुरुवार रातभर तेज बारिश हुई। रायगढ़ में भी रात से लगातार बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने उत्तर छत्तीसगढ़ में एक-दो स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका जताई गई है।
मौसम विभाग के मुताबिक चक्रवाती प्रणाली के कमजोर पड़ने के साथ प्रदेश में वर्षा की तीव्रता घटने की संभावना है। हालांकि आगामी दो नवंबर तक कुछ स्थानों पर बादल छाए रहने के साथ हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक की स्थिति बनी रह सकती है।
लगातार बारिश और आसमान में बादल छाए रहने से प्रदेश के तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। कई शहरों में अधिकतम तापमान सामान्य से छह से आठ डिग्री सेल्सियस तक नीचे पहुंच गया है। इसके कारण दिन के समय भी लोगों को ठंडक का अहसास होने लगा है।
राजधानी रायपुर में अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो सामान्य से 6.9 डिग्री कम है। वहीं पेंड्रारोड में अधिकतम तापमान सामान्य से 8.4 डिग्री नीचे रहा। मौसम में आए इस बदलाव से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिन के तापमान में गिरावट देखी जा रही है।
इधर, खराब मौसम और लगातार बारिश को देखते हुए दुर्ग, सरगुजा, कोरिया, बलरामपुर और रायगढ़ जिलों में शुक्रवार को स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शिक्षा विभाग ने इन जिलों के शासकीय और अशासकीय विद्यालयों को बंद रखने का निर्णय लिया है।
दूसरी ओर बेमौसम बारिश से प्रदेश के किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बलरामपुर, मुंगेली और धमतरी जिलों में कटाई के बाद खेतों में रखी धान की फसल बारिश के पानी से भीग गई है। लगातार नमी के कारण धान के दाने काले पड़ने लगे हैं और फफूंद लगने की आशंका बढ़ गई है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान होने का खतरा बना हुआ है।
पिछले दो दिनों से हो रही बारिश के कारण कई खेतों में जलभराव की स्थिति निर्मित हो गई है। तेज हवाओं और बारिश से पककर तैयार खड़ी धान की फसल भी जमीन पर गिरने लगी है। इसके चलते कटाई का काम प्रभावित हुआ है। खेतों में रखी कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना भी किसानों के लिए चुनौती बन गया है।
मौसम विभाग ने किसानों को बारिश की संभावना को देखते हुए फिलहाल पकी हुई फसलों की कटाई रोकने और पहले से काटी गई धान की फसल को सुरक्षित एवं सूखे स्थानों पर रखने की सलाह दी है। साथ ही खेतों में पानी की निकासी के पर्याप्त इंतजाम करने को कहा गया है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले 24 घंटे में चक्रवाती प्रणाली के और कमजोर होने से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां घटने की उम्मीद है। हालांकि, उत्तरी छत्तीसगढ़ सहित कुछ क्षेत्रों में मौसम का असर बने रहने की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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