रायपुर , जून 23 -- छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने राज्य में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, हरित औद्योगिकीकरण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीजी-सीबीजी) नीति 2026 को मंजूरी प्रदान की है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में अनुमोदित इस नीति के तहत कृषि अवशेष, पैडी स्ट्रॉ, पशु गोबर, नगरीय ठोस अपशिष्ट, प्रेसमड, गन्ना अवशेष तथा ऊर्जा फसलों से प्रतिवर्ष लगभग 1.65 लाख मीट्रिक टन कम्प्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) उत्पादन की संभावना जताई गई है।
सरकारी जानकारी के अनुसार नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रतिवर्ष लगभग 2.16 लाख टन पेट्रोल एवं डीजल के समतुल्य स्वच्छ ईंधन की आपूर्ति संभव होगी, जिससे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम होने के साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी।
श्री साय ने कहा कि यह नीति किसानों, गौपालकों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नए अवसर लेकर आएगी। कृषि अवशेषों और जैविक अपशिष्टों के बेहतर उपयोग से किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सीबीजी संयंत्रों से प्राप्त जैविक खाद के उपयोग से प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी। इससे भूमि की उर्वरता संरक्षण और टिकाऊ कृषि को भी बल मिलेगा।
राज्य सरकार के अनुसार यह नीति ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने तथा देश के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य में योगदान देने में सहायक होगी। इसे केंद्र सरकार की सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टुवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन (एसएटीएटी) पहल के अनुरूप तैयार किया गया है।
वर्तमान में रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर, राजनांदगांव, धमतरी, अंबिकापुर, रायगढ़ और कोरबा में बीपीसीएल तथा गेल इंडिया लिमिटेड के निवेश से सीबीजी संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
राज्य में निजी क्षेत्र से भी इस क्षेत्र में लगभग 3,600 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सरकार का मानना है कि नई नीति लागू होने के बाद निवेश, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को और गति मिलेगी।
नीति के क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (सीबीडीए) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित नीति में आधारभूत अधोसंरचना, फीडस्टॉक आपूर्ति, संयंत्र स्थापना सहायता, जैव उर्वरक प्रबंधन, सीबीजी मांग सृजन तथा निवेश प्रोत्साहन जैसे छह प्रमुख घटकों को शामिल किया गया है।
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