रायपुर , मई 13 -- छत्तीसगढ़ भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में मंगलवार और बुधवार को राजनीतिक प्रस्ताव और नक्सल उन्मूलन संबंधी प्रस्ताव पारित किए गए। बैठक में केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार की उपलब्धियों, नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई, सांस्कृतिक पुनर्जागरण, महिला सशक्तिकरण तथा विकास योजनाओं को प्रमुखता से रेखांकित किया गया जिसकी जानकारी आज बैठक खत्म होने के उपरांत भाजपा कार्यालय से दी गई।

राजनीतिक प्रस्ताव उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रस्तुत किया, जिसका समर्थन वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा तथा महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी ने किया। वहीं नक्सल उन्मूलन प्रस्ताव उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने रखा, जिसका समर्थन वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने किया।

कार्यसमिति ने विधानसभा, लोकसभा और नगरीय निकाय चुनावों में भाजपा को मिले ऐतिहासिक जनादेश के लिए प्रदेश की जनता के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रस्ताव में कहा गया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने 'मोदी गारंटी' के तहत किए गए अधिकांश प्रमुख वादों को पूरा कर जनता का विश्वास मजबूत किया है।

बैठक में दावा किया गया कि देशभर में भाजपा का जनाधार लगातार बढ़ रहा है। पश्चिम बंगाल, असम, पुडुचेरी, केरल और तमिलनाडु के चुनाव परिणामों का उल्लेख करते हुए इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय विचारधारा के विस्तार का संकेत बताया गया।

प्रस्ताव में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल को "सनातन पुनर्जागरण का काल" बताते हुए अयोध्या राम मंदिर, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल लोक, केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण, योग और आयुर्वेद को वैश्विक पहचान, जी-20 के दौरान भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रदर्शन तथा बाबा साहब आंबेडकर से जुड़े पंचतीर्थों के विकास जैसे कार्यों को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया गया।

प्रदेश सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा गया कि 18 लाख प्रधानमंत्री आवास, 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को वार्षिक सहायता, भूमिहीन किसानों को आर्थिक सहयोग, महिलाओं को भूमि पंजीयन में छूट और रानी दुर्गावती योजना जैसी योजनाओं ने जनता का विश्वास पुनर्स्थापित किया है।

कार्यसमिति ने 'सुशासन तिहार', 'समाधान योजना' और 'छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्र्य अधिनियम 2026' को भी सरकार की महत्वपूर्ण पहल बताया।

नक्सल उन्मूलन प्रस्ताव में कहा गया कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती माने गए माओवादी आतंक का सफाया डबल इंजन सरकार की ऐतिहासिक उपलब्धि है। प्रस्ताव में कहा गया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने के संकल्प को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

बैठक में सुरक्षा बलों, डीआरजी, स्थानीय पुलिस, जनप्रतिनिधियों और आदिवासियों के बलिदान को नमन करते हुए कहा गया कि भाजपा के भी सौ से अधिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि नक्सली हिंसा में शहीद हुए हैं।

प्रस्ताव में कहा गया कि नक्सलवाद केवल विकास की कमी का परिणाम नहीं, बल्कि एक वैचारिक हिंसक आंदोलन था, जिसने उन क्षेत्रों को निशाना बनाया जहां शासन की उपस्थिति सीमित थी। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने विभिन्न समयों में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से माओवादी गतिविधियों को संरक्षण दिया।

कार्यसमिति में कांग्रेस पर सलवा जुडूम आंदोलन को कमजोर करने, नक्सल घटनाओं पर सुरक्षा बलों पर सवाल उठाने तथा माओवादी समर्थक रुख अपनाने के आरोप भी लगाए गए।

बैठक में कहा गया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार की पुनर्वास नीति और "पूना मारगेम-पुनर्वास से पुनर्जीवन" अभियान के माध्यम से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को आर्थिक सहायता, कौशल विकास, शिक्षा, आवास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए, जिससे बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ।

कार्यसमिति ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना की कार्रवाई और "ऑपरेशन सिंदूर" का उल्लेख करते हुए सेना की वीरता की सराहना की।

महिला आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर नारी शक्ति वंदन कानून को लागू होने से रोकने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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