रायपुर , फरवरी 24 -- छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे "भ्रष्टाचार का बजट" करार दिया है। डॉ. महंत ने कहा कि सरकार का यह बजट प्रदेश को आगे ले जाने वाली 'गति' का नहीं, बल्कि प्रदेश की 'दुर्गति' करने वाला बजट है। उन्होंने इसे शब्दों का मायाजाल बताते हुए कहा कि युवाओं और महिलाओं को सिर्फ झुनझुना थमाया गया है।

नेता प्रतिपक्ष ने आज आरोप लगाया कि सरकार बस्तर और सरगुजा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के प्राकृतिक संसाधनों को अपने उद्योगपति मित्रों को सौंपने की तैयारी में है। उन्होंने जगदलपुर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार ने पूरी तरह से निर्मित इस अस्पताल भवन को बुनियादी ढांचे सहित हैदराबाद की एक निजी एजेंसी को किराए पर देने का निर्णय लिया है। डॉ. महंत ने आशंका जताई कि बजट में घोषित दो नई 'एजुकेशन सिटी' का हश्र भी इसी तरह निजीकरण की भेंट चढ़ सकता है।

डॉ. महंत ने सरकार की कार्यप्रणाली की खामियां गिनाते हुए कहा कि पिछले बजट में एम्स की तर्ज पर चार सिम्स और आईआईटी की तर्ज पर चार सीआईटी खोलने की बड़ी-बड़ी घोषणाएं की गई थीं, लेकिन पूरे एक साल में इनके लिए एक ईंट भी नहीं लगाई गई। उन्होंने कहा कि मौजूदा मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं, जिन्हें भरने के बजाय नए कॉलेजों की घोषणा करना सरकार का महज दिखावा है। उन्होंने राजधानी रायपुर के मेकाहारा स्थित सबसे बड़े सरकारी अस्पताल का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां करोड़ों रुपये की मशीनें तकनीशियन के अभाव में बेकार पड़ी हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने बजट में ग्रामीण क्षेत्रों की उपेक्षा का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ गांवों का प्रदेश है, लेकिन वित्त मंत्री का पूरा बजट भाषण रायपुर और नवा रायपुर की सड़कों के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गया। उन्होंने कहा कि बजट में एक भी गांव की सड़क का नाम नहीं लिया गया। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 30 स्कूल शिक्षकविहीन हैं, जिनमें मुख्यमंत्री के जिले के स्कूल भी शामिल हैं, लेकिन शिक्षकों की भर्ती पर सरकार मौन है।

उन्होंने कहा कि शिक्षित बेरोजगारों के लिए बजट में कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है। वहीं, प्रदेश की महतारी वंदन (डी.एड.) की महिलाएं अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से हड़ताल पर हैं, लेकिन सरकार उन्हें राहत देने के बजाय जेल में डाल रही है। डॉ. महंत ने कहा कि बजट में महिलाओं और युवाओं को नौकरी के नाम पर सिर्फ 'झुनझुना' थमाया गया है।

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