रायपुर , जुलाई 24 -- छत्तीसगढ़ सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता केंद्र के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत राज्य में डेटा आधारित हाइपरलोकल इंटरवेंशन कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, जिसका प्रथम चरण सड़क दुर्घटनाओं की दृष्टि से संवेदनशील 10 जिलों में लागू होगा।

परिवहन विभाग और आईआईटी मद्रास के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को रायपुर में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में यह समझौता किया गया। कार्यक्रम में वन, परिवहन, आवास एवं पर्यावरण तथा सहकारिता मंत्री केदार कश्यप मुख्य अतिथि थे।

समझौते के तहत सड़क दुर्घटना संबंधी आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर ब्लैक स्पॉट और दुर्घटना संभावित स्थलों की पहचान की जाएगी। इन स्थानों पर कम लागत वाले अभियांत्रिकी सुधार और हाइपरलोकल सड़क सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे। 'संजय' प्लेटफॉर्म के माध्यम से ब्लैक स्पॉट की समय पर पहचान कर साक्ष्य आधारित निर्णय लिए जाएंगे।

पहले चरण में राज्य के सर्वाधिक दुर्घटना प्रभावित 10 जिलों का चयन किया गया है। इन जिलों में जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद प्रत्येक जिले के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप डेटा आधारित सड़क सुरक्षा कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

श्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रत्येक सड़क दुर्घटना किसी परिवार के लिए अपूरणीय क्षति होती है। राज्य सरकार का लक्ष्य केवल दुर्घटनाओं की संख्या कम करना नहीं, बल्कि ऐसी सुरक्षित सड़क व्यवस्था विकसित करना है, जिससे प्रत्येक नागरिक सुरक्षित अपने घर पहुंच सके। उन्होंने कहा कि यह पहल सुरक्षित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

परिवहन विभाग के सचिव एस. प्रकाश ने कहा कि 'संजय' प्लेटफॉर्म के माध्यम से दुर्घटना संभावित स्थलों की वैज्ञानिक पहचान कर समयबद्ध हस्तक्षेप संभव होगा। उन्होंने सभी संबंधित विभागों से समन्वित प्रयास कर दुर्घटनामुक्त छत्तीसगढ़ के लक्ष्य की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया।

कार्यशाला में चयनित 10 जिलों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, जिला परिवहन अधिकारी, जिला सड़क सुरक्षा प्रबंधक तथा जिला सड़क सुरक्षा समिति के नोडल अधिकारियों ने भाग लिया। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने विश्वास जताया कि डेटा आधारित योजना और त्वरित हस्तक्षेप से सड़क दुर्घटनाओं तथा मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सकेगी।

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