रायपुर , सितंबर 23 -- छत्तीसगढ़ निजी विद्यालय प्रबंधन संघ ने राज्य के कुछ सरकारी स्कूलों में बोर्ड परीक्षा का परिणाम बेहतर रखने के लिए विद्यार्थियों के विषय चयन में हस्तक्षेप किए जाने का आरोप लगाते हुए स्कूल शिक्षा विभाग से मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है।
संघ का आरोप है कि कुछ शासकीय स्कूलों में नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को उनकी इच्छा के बावजूद अंग्रेजी विषय लेने से रोका जा रहा है और इसके स्थान पर बैंकिंग एवं वित्त जैसे वैकल्पिक विषय चुनने के लिए कहा जा रहा है। संघ से बुधवार को मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर विद्यार्थियों को उनकी रुचि और भविष्य की पढ़ाई के अनुरूप विषय चुनने की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मांग की है।
संघ के अध्यक्ष राजीव गुप्ता के मुताबिक दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षाओं में खराब परिणाम आने के बाद शासकीय स्कूलों के प्राचार्यों पर प्रशासनिक कार्रवाई और तबादले का दबाव बना हुआ है। उनका आरोप है कि इसी कारण कुछ स्कूलों में अंग्रेजी विषय में कमजोर परिणाम की आशंका को देखते हुए नौवीं और ग्यारहवीं के विद्यार्थियों को अंग्रेजी लेने से हतोत्साहित किया जा रहा है। इसके बदले बैंकिंग और वित्त जैसे वैकल्पिक विषयों की ओर विद्यार्थियों को भेजे जाने की शिकायत सामने आई है।
संघ ने इस व्यवस्था से विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा प्रभावित होने की आशंका जताई है। उसका कहना है कि बारहवीं कक्षा में अंग्रेजी विषय नहीं होने की स्थिति में विद्यार्थियों को आगे नर्सिंग और फार्मेसी सहित ऐसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश के दौरान परेशानी हो सकती है, जहां बारहवीं स्तर पर अंग्रेजी विषय की आवश्यकता होती है।
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