रायपुर , सितंबर 19 -- छत्तीसगढ़ के सात वर्षीय 'गूगल बॉय' रुद्र शर्मा ने बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य को लेकर 'जंक फूड हटाओ, मोबाइल का सही उपयोग सिखाओ' संकल्प के साथ शनिवार से देशव्यापी जागरूकता मुहिम शुरू की है। इसके तहत वह अभिभावकों और बच्चों को जंक फूड से पूरी तरह दूरी बनाने तथा डिजिटल युग में मोबाइल फोन का संतुलित एवं सही उपयोग करने की शपथ दिला रहे हैं।

रुद्र शर्मा ने जंक फूड के बढ़ते सेवन पर चिंता जताते हुए कहा कि आज का खान-पान बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में बड़ी बाधा बन रहा है। उन्होंने कहा कि पिज्जा, बर्गर, पास्ता, मैगी, चिप्स और कुरकुरे जैसे प्रोसेस्ड फूड स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक हैं। उन्होंने आगाह किया कि इन चीजों के लगातार सेवन से कम उम्र में ही बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारियां, पेट के रोग, चिड़चिड़ापन, भूख न लगना, अत्यधिक मोटापा और अत्यधिक दुबलापन जैसी गंभीर समस्याएं देखने को मिल रही हैं।

उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के भोजन में पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजनों को प्राथमिकता देने की अपील की। रुद्र शर्मा ने पिज्जा के विकल्प के रूप में मेथी पिज्जा और बाजार में मिलने वाले बर्गर की जगह चावल की मोटी रोटी, इडली, फरा, चीला तथा डोसा जैसे पारंपरिक पकवान परोसने का सुझाव दिया। इसी तरह बाजार के मैदे वाले पास्ता-मैगी के स्थान पर गेहूं या सूजी से बने पास्ता और मैगी के उपयोग की बात कही। उन्होंने दैनिक आहार में अधिक से अधिक हरी सब्जियां, ताजे फल और अंकुरित सलाद शामिल करने की सलाह दी।

मोबाइल फोन के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर भी रुद्र शर्मा ने बच्चों के साथ युवाओं और वयस्कों को सतर्क किया। उन्होंने कहा कि आज बच्चों से ज्यादा बड़े भी मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग कर रहे हैं, जिसका सीधा असर बच्चों के व्यवहार पर पड़ता है। उन्होंने बड़ों से अपील की कि वे मोबाइल का उपयोग केवल आवश्यकता पड़ने पर ही करें और अनावश्यक डिजिटल उपयोग से बचें।

रुद्र शर्मा ने अभिभावकों से अपने व्यस्त दिनचर्या में बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण समय निकालने का आग्रह करते हुए कहा कि बच्चों को रोजाना पार्क ले जाएं और उनके साथ बाहर घूमें। घर में बच्चों के साथ खेलने के अलावा मैदानी और कसरती खेल खेलें तथा उनसे नियमित बातचीत कर उनकी भावनाओं को समझें।

उन्होंने कहा कि जब अभिभावक बच्चों को पर्याप्त समय देंगे और उन्हें शारीरिक खेल-कूद से जोड़ेंगे, तो बच्चों का ध्यान स्वतः ही मोबाइल से हटकर कसरती खेलों की ओर लगेगा। इससे बच्चे शारीरिक रूप से मजबूत और मानसिक रूप से तंदुरुस्त बनेंगे।

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