मुरैना , फरवरी 14 -- मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में एक ऐसा मंदिर है, जहां महादेव शिव माता पार्वती और माँ दुर्गा की सेविकाओं 64 योगिनियों के साथ विराजे हैं।
ये 64 योगिनी मंदिर तंत्र विद्या का विश्वविद्यालय भी कहा जाता था। देश में 64 योगिनी मंदिर दो-तीन और भी हैं, पर चंबल किनारे बसे मुरैना का मंदिर इसलिए सबसे अलग है क्योंकि ये गोलाकार मंदिर प्राचीन संसद भवन की मूल प्रतिकृति माना जाता है। मुरैना के पास मितावली गांव में पहाड़ी के शिखर पर खड़ा पत्थरों का बना ये भव्य मंदिर जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर नौवीं शताब्दी का बना माना जाता है।
मंदिर के अंदर की संरचना और आश्चर्य से भर देती है। दो सर्कल में बंटे इस मंदिर के बाहरी सर्कल में 64 छोटे आले सरीखे मंदिर हैं, जिनमें हर में महादेव विराजे हैं। अंदरूनी सर्कल में मुख्य महादेव और माँ पार्वती हैं, जिनकी पूजा होती है। महाशिवरात्रि के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में पूजन के लिए पहुंचते हैं।
किले के अंदर मौजूद शिलालेखों को पढ़कर ये अनुमान लगाया जाता है कि इस किले को महाराज देवपाल ने बनवाया था। वहीं यह भी कहा जाता है कि इसका निर्माण 9वीं शताब्दी के अंत में कच्छपघाट राजवंश के शासनकाल के दौरान हुआ था। प्राचीन समय में मुरैना जिले के हिस्से मितावली, पढ़ावली और बटेश्वर, त्रिमूर्ति की तरह थे, जो विश्वविद्यालय की तरह काम करते थे। यहां सूर्य की किरणों के माध्यम से गणित ज्योतिष विद्या और हिन्दू धर्म की शिक्षा दी जाती थी। गोलाकर मंदिर का घेरा 170 फीट है। इस गोल बरामदे में 64 कमरे बने हुए हैं, जहां प्राचीन समय में 64 योगिनियों की मूर्तियां रखी होती थी।
स्थानीय बलुआ पत्थर से बनी गोलाकार संरचना में जटिल नक्काशीदार खंभे और मूर्तियां हैं जो विभिन्न रूपों और मुद्राओं में 64 योगिनियों को दर्शाती हैं। मंदिर का खुला-हवा वाला डिजाइन, इसके केंद्रीय प्रांगण के साथ, एक विशिष्ट विशेषता है जो इसे अपने युग के अन्य मंदिरों से अलग बनाती है।
पुरातत्व विभाग के अधीन इस मंदिर पर विदेशी पर्यटक भी आते हैं, लेकिन अभी भी यहाँ सुविधाओं का अभाव है।
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