कोलकाता , अक्टूबर 22 -- पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में चौरबगान दुर्गा पूजा भगदड़ मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) की प्रमुख, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अनिंदिता राय सरस्वती ने गुरुवार को कहा कि मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जा सकता है, लेकिन जांच में आसानी के लिए पूजा पंडाल को उसकी वर्तमान स्थिति में ही सुरक्षित रखना होगा।

दुर्घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने पाया कि पंडाल में रोशनी की अपर्याप्त व्यवस्था थी और इसके प्रवेश एवं निकास मार्ग बेहद संकीर्ण थे, जिसके कारण यह भयानक हादसा हुआ और 19 लोगों की जान चली गयी।

एसआईटी प्रमुख राय सरस्वती ने कहा, "प्रतिमा का विसर्जन किया जा सकता है, लेकिन पंडाल जैसा है वैसा ही रहना चाहिए। मैं चाहती हूं कि इसे इसकी वर्तमान स्थिति में ही सुरक्षित रखा जाए और विसर्जन उसी के अनुसार किया जाए।"कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद राज्य सरकार द्वारा गठित छह सदस्यीय एसआईटी ने गुरुवार शाम करीब 6:50 बजे पंडाल का दौरा किया। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी जावेद शमीम और अन्य अधिकारियों के साथ इस टीम ने संरचना के आंतरिक और बाहरी हिस्सों का निरीक्षण किया। उन्होंने इसके लेआउट, प्रवेश और निकास बिंदुओं तथा भगदड़ से जुड़ी परिस्थितियों की बारीकी से जांच की। इस दौरान दुर्घटनास्थल की वीडियोग्राफी भी कराई गई।

एसआईटी प्रमुख ने त्रासदी के बाद उठी चिंताओं को स्वीकार करते हुए कहा, "रोशनी की व्यवस्था वैसी ही रखी गयी है जैसी घटना के समय थी। वहां रोशनी बहुत कम थी।" उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पंडाल के अंदर जाने और बाहर निकलने के रास्ते बेहद तंग थे, जिससे यह संकेत मिलता है कि सीमित जगह से बड़ी संख्या में लोगों के प्रवेश करने के कारण यह हादसा हुआ होगा।

उन्होंने कहा कि भगदड़ पूजा पंडाल के अंदर नहीं, बल्कि उसके निकास द्वार के ठीक बाहर हुई थी।

एसआईटी पंडाल की सजावट और प्रबंधन में शामिल हर व्यक्ति से पूछताछ करेगी, जिसमें इसके डिजाइन के लिए जिम्मेदार कलाकार भी शामिल हैं। इसके अलावा कोलकाता पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी, जो आयोजन स्थल पर व्यवस्थाओं को लेकर सवालों के घेरों में हैं।

टीम इस बात की भी जांच करेगी कि क्या मौके पर पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे और लाउडस्पीकर पर पंडाल गिरने की कथित घोषणा से जुड़ी परिस्थितियों की जांच करेगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस घोषणा के कारण श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई और वे बाहर निकलने के लिए भागने लगे, जिससे स्थिति और बिगड़ गयी। एसआईटी प्रमुख ने कहा कि घोषणा करने वालों की भूमिका की भी जांच होगी।

इस बीच, कोलकाता पुलिस ने गुरुवार को भगदड़ की अपनी समानांतर जांच जारी रखी और घटनास्थल की जांच के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों और उन्नत डिजिटल तकनीक को तैनात किया। जासूसी विभाग और होमिसाइड विंग के अधिकारियों ने फोरेंसिक विशेषज्ञों के साथ मिलकर 3डी स्कैनर का उपयोग करके आपदा स्थल का डिजिटल मानचित्र तैयार किया। पुलिस सूत्रों ने कहा कि यह तकनीक घटनाक्रम को समझने में मदद करेगी।

एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, कोलकाता पुलिस के एंटी-राउडी स्क्वाड ने गुरुवार को नदिया से चोरबगान दुर्गा पूजा समिति के कोषाध्यक्ष संजीब राहा उर्फ सेंटू को विवादास्पद घोषणा के सिलसिले में हिरासत में ले लिया। अपर पुलिस आयुक्त (अपराध) कुणाल अग्रवाल ने हिरासत की पुष्टि की। पुलिस राहा से पूछताछ कर रही है ताकि घोषणा में उसकी कथित भूमिका और दूसरों की संलिप्तता का पता लगाया जा सके।

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