चेन्नई , जुलाई 23 -- चेन्नई के प्रधान सत्र न्यायालय ने गुरुवार को एक पत्रकार को सशर्त जमानत देते हुए कहा कि मंत्रियों या सरकार की आलोचना करने को राज्य के खिलाफ अपराध या सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने वाला कृत्य नहीं माना जा सकता है।
यह टिप्पणी पत्रकार विनोद सूर्याकुमार को सशर्त जमानत देते समय आई, जिन्हें केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) ने 15 जुलाई को गिरफ्तार किया था। उन पर सोशल मीडिया पर यह कथित झूठी खबर फैलाने का आरोप था कि तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक और बंदोबस्ती मंत्री पलानी स्थित प्रसिद्ध अरुलमिगु दंडयुधापानी स्वामी मंदिर की 100 करोड़ रुपये मूल्य की 1.40 एकड़ भूमि के अवैध हस्तांतरण में शामिल हैं।
जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रधान सत्र न्यायाधीश एस. कार्तिकेयन ने नोट किया कि पलानी मंदिर की संपत्ति से जुड़ी कथित अनियमितताओं की खबरें पहले ही मीडिया में आ चुकी थीं। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता की सोशल मीडिया पोस्ट इन्हीं खबरों पर आधारित प्रतीत होती है और इससे देश की संप्रभुता या राष्ट्रीय सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है।
अदालत ने श्री विनोद को 25,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो ज़मानतों पर सशर्त जमानत देते हुए निर्देश दिया कि वे अगले आदेश तक रोजाना सीसीबी के समक्ष पेश होंगे।
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