चेन्नई , सितंबर 01 -- मद्रास उच्च न्यायालय ने आतंकवाद से जुड़े मुकदमों और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की सुनवाई में तेजी लाने के लिए केंद्र और तमिलनाडु सरकार को यहां राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की अलग से 'विशेष अदालत' गठित करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति अनिता सुमंत और न्यायमूर्ति सुंदर मोहन की खंडपीठ ने 2022 में दीपावली की पूर्व संध्या पर हुए कोयंबटूर कार बम विस्फोट के एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया। इस विस्फोट में एकमात्र आत्मघाती हमलावर जमीशा मुबीन मारा गया था। एनआईए की शुरू की गयी जांच से बाद में पता चला कि यह आतंकवादी घटना थी।
बीती शाम सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव और तमिलनाडु सरकार के अपर मुख्य सचिव को भी पक्षकार बनाया। न्यायालय ने उन्हें आतंकवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए विशेष अदालतें गठित करने के संबंध में अपने जवाब और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया तथा मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 सितंबर की तारीख तय की।
कोयंबटूर के उक्कडम स्थित अरुलमिगु कोट्टई संगमेश्वरर मंदिर के सामने 23 अक्टूबर 2022 को एक मारुति कार में विस्फोट हो गया था, जिसमें कार चला रहा जमीशा मुबीन मारा गया था। इस मामले की जांच एनआईए कर रही है। हमले में इस्तेमाल कार खरीदने के आरोप में तीसरे आरोपी मोहम्मद तल्हा को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
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