चेन्नई , मार्च 27 -- तमिलनाडु में चेन्नई के प्रतिष्ठित सरकारी अन्ना विश्वविद्यालय में महज तीन महीने के अंदर यौन उत्पीड़न का एक और मामला सामने आया है, जिसके विरोध में विद्यार्थियों और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) सहित विभिन्न छात्र संगठनों के सदस्यों ने विश्वविद्यालय के प्रवेश द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया।

विरोध प्रदर्शनों के कारण तनाव बढ़ने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रोफेसर ज्ञानवेल बाबू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। गौरतलब है कि इससे पहले 24 दिसंबर को विश्वविद्यालय परिसर में एक छात्रा के साथ यौन उत्पीड़ने का मामला सामने आया था, जिसको लेकर काफी विवाद हुआ था।

पीड़ितों में से एक की शिकायत पर कोट्टूरपुरम महिला पुलिस थाने ने एक मामला दर्ज किया और प्रोफेसर के खिलाफ दो धाराओं के तहत केस दर्ज किया, जिसमें 'महिलाओं के उत्पीड़न की रोकथाम अधिनियम' भी शामिल है। बाद में पुलिस की एक विशेष टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

विश्वविद्यालय की चार और छात्राएं प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के लिए आगे आई हैं और पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है। इससे पहले विरोध कर रहे विद्यार्थियों ने आरोप लगाया था कि यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ कई शिकायतें मिलने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। हाथों में तख्तियाँ लिए और कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग, गिंडी (जिसे अन्ना यूनिवर्सिटी भी कहा जाता है) परिसर के प्रवेश द्वार पर धरने पर बैठे विद्यार्थियों ने माँग की कि जाँच पूरी होने तक प्रोफ़ेसर को निलंबित किया जाए और एक स्वतंत्र समिति का गठन किया जाए जो विभाग की सभी छात्राओं के बयान अलग-अलग दर्ज करे। विभाग के विद्यार्थियों ने कहा, "हमने पिछले दो सालों में प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ पोस्को के तहत दो शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन पर्याप्त सबूत न होने का हवाला देते हुए कोई कार्रवाई नहीं की गयी।" उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का आंतरिक तंत्र शिकायत पर कार्रवाई करने में विफल रहा है।

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