, Dec. 9 -- भाजपा के निशिकांत दुबे ने कहा कि भाजपा संवैधानिक तरीके से काम करती है और उनकी पार्टी में अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का होता है। भाजपा संगठन पूरी तरह से लोकतांत्रिक है लेकिन कांग्रेस में हमेशा एक ही परिवार का दबदबा चलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस हमेशा मुस्लिम परस्त रही है और हमेशा उसी के सहारे राजनीति करती रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा लोकतांत्रिक संस्थाओं को ध्वस्त किया है और संवैधानिक संस्थानों की स्वायत्तता खत्म की है।

आम आदमी पार्टी के गुरमीत सिंह मीत हेयर ने कहा कि आज देश के सामने लोगों के वोट चोरी हो रहे हैं। लोगों के वोटों पर डाका डाला जा रहा है और इसके कारण जनता का लोकतंत्र पर विश्वास कम हो रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में वोटरों की संख्या चार साल में 25 हजार बढी लेकिन हाल के सिर्फ छह माह में साढे चार लाख से अधिक मतदाता दिल्ली में हो गये। इतने मतदाता छह माह में कहां से आए। बिहार में 65 लाख वोट काटे गये हैं और वहां जो सत्ताधारी दल के उम्मीदवार जीते हैं उनमें करीब 150 उम्मीदवार ऐसे हैं जो मामूली वोटों के अंतर से जीते हैं।

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग-आईयूएमएल के डॉ एम पी अब्दुस्समद समदानी ने कहा कि लोकतंत्र तब तक सुरक्षित नहीं रह सकता जब तक सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार नहीं होता है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को संविधान में जो अधिकार दिये गये हैं वे प्रचुर हैं और उन सबका इस्तेमाल कर चुनाव आयोग को और मजबूत कर चुनाव सुधारों को ज्यादा प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि संविधान निर्माताओं के लिए चुनाव आयोग बहुत महत्वपूर्ण संस्था रही है और इसकी स्थापना के उपलक्ष में हर वर्ष 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर आयोजन किया जाता है जिसमें विदेशी मेहमान भारत के चुनाव और चुनावी प्रक्रिया पर चर्चा करते हैं। इसमें विदेशी मेहमान भारतीय चुनावी प्रक्रिया की प्रशंसा करते हैं। चुनाव में एक मतदाता का एक वोट होता है और यही लोकतंत्र की ताकत है। वोटर सूची सही हो और कोई अपात्र व्यक्ति इसमें शामिल नहीं हो यह काम चुनाव आयोग को करना ही होता है। पहले भी ऐसा होता रहा है लेकिन हम करते हैं तो कांग्रेस को दिक्कत होने लगती है और उनकी सरकार यही काम करती है तो तब ठीक माना जाता है। यह दोहरी नीति है और यह नीति अनुचित है।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने प्रथम चुनाव के समय से ही अच्छा काम करना शुरु कर दिया था। उस समय से अब तक चुनाव आयोग इसी प्रक्रिया के तहत देश में चुनाव कराता रहा है और चुनाव निष्पक्ष हो रहे हैं इसलिए आयोग पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि बाबा साहेब अम्बेडकर ने कहा था कि चुनाव आयोग स्वायत्त संस्था है और उसकी भूमिका को लेकर सदन में विचार नहीं किया जा सकता है इसीलिए एसआईआर पर नहीं अब चुनाव सुधार पर चर्चा कराई जा रही है। उनका कहना था कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाता सूची में सुधार आवश्यक है और यही काम चुनाव आयोग एसआईआर के जरिए कर रहा है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। यह निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी है और आयोग स्वतंत्र तथा साफ सुथरे चुनाव के लिए वोटर लिस्ट में सुधार के वास्ते एसआईआर की प्रक्रिया अपना रहा है।

श्री मेघवाल ने कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाया और कहा कि 1951 में जब पहला चुनाव हुआ था तो बाबा साहब आम्बेडकर मामूली वोटों से हारे थे लेकिन कांग्रेस की सरकार ने 74 हजारों वोटों को खारिज करवा दिया था। डॉ अम्बेडकर ने 18 पन्नों की शिकायत की और कहा कि जिस नेता ने संविधान को बनाया उन्हीं को कांग्रेस ने अपने षडयंत्र से हरवा दिया था। उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वह संविधान की पुस्तक लेकर जरूर आते हैं लेकिन खुद संविधान पढ़ते नहीं हैं। उनका कहना था कि चुनाव सुधारों के लिए कांग्रेस सरकारें बराबर संशोधन करती रही है और इस क्रम में अगर भाजपा सरकार ने इसमें सुधार करना शुरु किया इसमें बुराई क्या है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने हाल ही स्पष्ट किया है कि निर्वाचन आयोग को पूरे देश में मतदाता सूची में सुधार करने का संवैधानिक अधिकार है और इस काम को रोका नहीं जा सकता है। उन्होंने विपक्ष पर विरोधाभी होने का आरोप लगाया और कहा कि न्यायाधीश या चुनाव आयोग को सेवानिवृत्त होने के बाद यदि राज्यसभा की सीट दी जाती है तो कांग्रेस इसे सही मानती है और अगर यही काम यदि भाजपा सरकार करे तो इसे गलत मानती है। उन्होंने इसे दोहरी नीति और विरोधाभास की स्थिति बताया और कहा कि विपक्ष को चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठाने चाहिए।

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