जयपुर , जुलाई 17 -- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि राज्य सरकार के लिए इससे अधिक शर्मनाक स्थिति और क्या होगी कि पंचायत और निकाय चुनावों में हो रही जानबूझकर देरी पर उच्च न्यायालय को यहां तक कहना पड़ रहा है कि 'आयोग चुनाव नहीं करवा सकता तो बताये, जज करवा देंगे।' यह सरकार की घोर प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है।

श्री गहलोत ने शुक्रवार को यहां अपने एक बयान में यह बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग का यह कथन बेहद गंभीर और चिंताजनक है कि पंचायती राज विभाग को छह चिट्ठियां लिखने के बावजूद अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग तथा महिला आरक्षण संबंधी जानकारी नहीं दी गयी। यह स्पष्ट दर्शाता है कि सरकार के दबाव में पंचायतीराज विभाग ने ऐसा किया और सरकार की मंशा ही चुनाव कराने की नहीं है और वह संवैधानिक संस्थाओं को पंगु बना रही है।

उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेशों की बार-बार अवहेलना करना संविधान और न्यायपालिका का सीधा अपमान है। जो सरकार न्यायपालिका का सम्मान न कर सके और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को रोके, उसे एक पल भी सत्ता में बने रहने का नैतिक और संवैधानिक अधिकार नहीं है। लोकतंत्र के लिए यह स्थिति बेहद घातक है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित