नयी दिल्ली , फरवरी 26 -- उच्चतम न्यायालय ने चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों की अनियंत्रित खर्च पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका पर गुरुवार को केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पांचोली की पीठ ने केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग से उनके जवाब मांगते हुए मामले की सुनवाई छह सप्ताह बाद तय की है। पीठ ने चिंता जताते हुए कहा कि यह मुद्दा कुछ महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न उठाता है।
गैर-सरकारी संगठन 'कॉमन कॉज' की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि अनियंत्रित राजनीतिक खर्च लोकतंत्र को विकृत कर रहा है। उन्होंने चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द करने वाले उच्चतम न्यायालय के 2024 के फैसले का हवाला दिया, जिसमें अदालत ने अनियमित राजनीतिक वित्तपोषण के हानिकारक प्रभाव को स्वीकार किया था। उन्होंने पीठ से कहा कि चुनावों के दौरान बेलगाम धन खर्च की समस्या लोकतंत्र को प्रभावित करने वाला एक बुनियादी मुद्दा है।
न्यायाधीशों ने हालांकि इस पर भी चिंता जताई कि खर्च की सीमा को कैसे लागू किया जा सकता है। न्यायमूर्ति बागची ने उल्लेख किया कि अमेरिका जैसे देशों में भी, जहाँ सीमाएँ तय हैं, पैसा अक्सर उम्मीदवारों के दोस्तों और सहयोगियों के माध्यम से आता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐसी सीमाएँ लगाने से संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं, जो भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है और जिसे राजनीतिक समर्थन भी शामिल है।
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