कोलकाता , मार्च 28 -- चुनाव आयोग ने शुक्रवार देर रात संशोधित मतदाता सूची के दूसरे चरण में पश्चिम बंगाल के एक पूर्व सांसद तरुण मंडल का ही नाम मतदाता सूची से हटा दिया है।
दिलचस्प यह है कि जहां श्री मंडल का नाम चुनाव आयोग ने हटा दिया है, वहीं उनकी पत्नी महुआ मंडल को अद्यतन सूची में वैध मतदाता के रूप में बरकरार रखा है, जबकि उनका नाम भी विचाराधीन था।
श्री मंडल 2009 में कांग्रेस-तृणमूल गठबंधन के समर्थन से दक्षिण 24 परगना के जयनगर से निर्वाचित हुए थे। वह एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने देखा कि उनका नाम 'विचाराधीन श्रेणी' से हटाकर बाहर की गयी सूची में डाल दिया गया है। दक्षिण हावड़ा विधानसभा क्षेत्र के निवासी श्री मंडल नाम हटाये जाने से पहले बूथ संख्या 279 के अंतर्गत सूचीबद्ध थे।
श्री मंडल ने शनिवार को राज्य के मुख्य वुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल से मुलाकात की और कई सहायक दस्तावेजों के साथ ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा, "मैं सांसद और शिक्षक रहा हूं। मेरे पास सरकारी सेवा, पेंशन और सांसद के रूप में मेरे कार्यकाल के रिकॉर्ड जैसे व्यापक दस्तावेज हैं। अगर मेरा नाम हटाया जाता है, तो मैं आम जनता की स्थिति समझ सकता हूं।"जब मुख्य चुनाव अधिकारी की प्रतिक्रिया के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, " वह इस मसले से निरपेक्ष नजर आये। उन्होंने कहा कि सभी निर्णय न्यायाधिकरण की ओर से लिये जायेंगे।"श्री मंडल ने इस प्रक्रिया पर चिंता जताते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी दस्तावेजों के साथ पत्र भेजे हैं।
इससे पहले, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने के बाद श्री मंडल सुनवाई में भी शामिल हुए थे और उन्होंने आवश्यक दस्तावेज भी जमा कराये थे, तब उनका नाम 'विचाराधीन' सूची में डाला गया था। अब अंतिम संशोधन में हालांकि उन्हें सूची से बाहर कर दिया गया है।
एसआईआर प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत संचालित की जा रही है, जिसमें कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी.एस. शिवगणनम की देखरेख में न्यायिक अधिकारी विवादित नामों की जांच कर रहे हैं।
इस मुद्दे ने राजनीतिक उम्मीदवारों को भी प्रभावित किया है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के कई नाम शुरू में 'विचाराधीन' श्रेणी में रखे गये थे।
पार्टी ने इस सप्ताह की शुरुआत में मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी, जिसमें कहा गया था कि उसके 11 उम्मीदवार जांच के दायरे में हैं।
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