कोलकाता , मार्च 17 -- चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए सामान्य पर्यवेक्षकों और पुलिस पर्यवेक्षकों की अब तक की सबसे बड़ी तैनाती की है।
अधिकारियों के अनुसार सभी चुनाव क्षेत्रों में 'पूर्ण कवरेज' का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है।
आयोग की अधिसूचना के अनुसार, राज्य में कुल 474 पर्यवेक्षक तैनात किये जायेंगे। इनमें 294 सामान्य पर्यवेक्षक शामिल हैं। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए एक। यह इतना ज्यादा है कि इस चुनावी सीजन में किसी भी अन्य चुनावी राज्य से इसकी तुलना नहीं हो सकती। इसके अलावा 100 व्यय पर्यवेक्षक और 84 पुलिस पर्यवेक्षक भी तैनात किये गये हैं।
इसके विपरीत अन्य प्रमुख राज्य निगरानी के इस अति सक्रिय स्तर से काफी पीछे हैं। असम में 126 विधानसभा सीटें हैं, लेकिन वहां केवल 51 सामान्य पर्यवेक्षक तैनात किये गये हैं, जो लगभग 40 प्रतिशत निर्वाचन क्षेत्रों को कवर करते हैं। इसी तरह केरल की 140 सीटों के लिए भी केवल 51 सामान्य पर्यवेक्षक हैं, जो महज 36 प्रतिशत से कुछ अधिक कवरेज है। तमिलनाडु में 234 चुनाव क्षेत्र होने के बावजूद वहां 136 सामान्य पर्यवेक्षक तैनात हैं, जो करीब 58 प्रतिशत कवरेज है।
जहां तक पुलिस पर्यवेक्षकों का सवाल है, पश्चिम बंगाल में एक बार फिर सबसे अधिक संख्या दर्ज की गयी है। यहां चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था की निगरानी के लिए 84 अधिकारी तैनात किये गये हैं। यह सामान्य पर्यवेक्षकों की तरह 100 प्रतिशत का आंकड़ा तो नहीं है, लेकिन अन्य राज्यों की तुलना में वास्तविक संख्या के मामले में यह काफी ज्यादा है।
चुनाव आयोग ने तमिलनाडु में केवल 40 पुलिस पर्यवेक्षक तैनात किये हैं। इसके बाद असम में 35 और केरल में केवल 17 पर्यवेक्षक तैनात किये गये हैं। चुनाव आयोग ने हालांकि पांच चुनावी राज्यों और जारी उपचुनावों में सामान्य, पुलिस और व्यय पर्यवेक्षकों सहित कुल 1,111 पर्यवेक्षकों को तैनात किया है। इनमें से अकेले पश्चिम बंगाल में सामान्य पर्यवेक्षकों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी (557 में से 294) है, जो देशभर में तैनात कुल सामान्य पर्यवेक्षकों के 50 प्रतिशत से भी अधिक है।
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