कोलकाता , अप्रैल 22 -- चुनाव आयोग ने उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद बुधवार तड़के पश्चिम बंगाल की एक पूरक मतदाता सूची प्रकाशित की, जिसमें न्यायाधिकरण की कार्यवाही के माध्यम से स्वीकृत नामों को शामिल किया गया है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण से पहले चुनाव आयोग का यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
तड़के साझा की गयी इस सूची में उन पूर्व विवादित मतदाताओं की पहचान की गयी है, जो अब गुरुवार को होने वाले महत्वपूर्ण मतदान में अपना वोट डालने के पात्र होंगे। 'अपीलीय न्यायाधिकरण पूरक सूची संख्या 1'शीर्षक वाली यह सूची उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में जारी की गयी है।
इसमें स्पष्ट किया गया है कि वे मतदाता, जिनके मामले जांच के दायरे में थे, उन्हें मतदाता सूची में बहाल कर दिया गया है और वे 23 अप्रैल को पहले चरण के मतदान में अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल कर सकेंगे। आयोग के सूत्रों के अनुसार, कितने नाम जोड़े या हटाये गये हैं, इसका विस्तृत विवरण अभी साझा नहीं किया गया है। अंतिम आंकड़ों सहित एक विस्तृत रिपोर्ट बुधवार शाम तक उपलब्ध होने की उम्मीद है। यह घटनाक्रम उन हजारों व्यक्तियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो पिछले कुछ दिनों से अपने नाम हटाये जाने या मतदाता विवरण में विसंगतियों के विरुद्ध लड़ाई लड़ रहे थे।
उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन लोगों के नाम 21 अप्रैल तक न्यायाधिकरण के आदेशों के माध्यम से बहाल किये गये हैं, वे पहले चरण में मतदान के पात्र हैं।
बहाल किये गये नामों के साथ, आयोग ने उन व्यक्तियों की सूची भी प्रकाशित की है, जिनके नाम न्यायाधिकरण की जांच के बाद स्थायी रूप से हटा दिये गये हैं। नाम जोड़ने और हटाने के स्पष्ट आंकड़ों के अभाव में संशोधनों की कुल संख्या की फिलहाल जानकारी नहीं हो पा रही है।
गुरुवार को पहले चरण का मतदान 152 विधानसभा क्षेत्रों में होगा। उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया था कि विवादित मतदाताओं पर 21 अप्रैल तक के न्यायाधिकरण के सभी निर्णयों को मतदान के दिन से पहले सूचीमें दर्शाया जाना चाहिये, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पात्र व्यक्तियों को उनके मताधिकार से वंचित न किया जाये। विशेष गहन पुनरीक्षण के प्रारंभ होने से पहले, इन मतदान वाले क्षेत्रों में मतदाताओं की कुल संख्या 3,98,14,801 थी।
इनमें से 36,58,517 मतदाता विचाराधीन थे। न्यायाधिकरण की ओर से निस्तारण के बाद, उपलब्ध नवीनतम आंकड़े संकेत देते हैं कि मतदाताओं की संख्या संशोधित होकर 3,60,77,171 हो गयी है।
जिन मतदाताओं के नाम न्यायाधिकरण के निर्णयों के बाद भी शामिल नहीं किये गये, उन्होंने नाम जुड़वाने के लिए अपीलीय तंत्र का द्वार खटखटाया है। पूरी रिपोर्ट जारी होने के बाद चुनाव आयोग द्वारा और स्पष्टता प्रदान करने की उम्मीद है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित