दावणगेरे , अप्रैल 06 -- कर्नाटक में चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन के मुद्दे पर सोमवार को केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी तथा राज्य के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई और श्री जोशी ने मुख्यमंत्री की चिंताओं को 'पूरी तरह बकवास' बताते हुए खारिज कर दिया।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब श्री सिद्दारमैया ने दावा किया कि भविष्य में जब चुनाव क्षेत्रों की सीमाएं दोबारा तय होंगी, तो दक्षिण भारतीय राज्यों को नुकसान होगा और उन्हें देश के कुल प्रतिनिधित्व का केवल 24 प्रतिशत हिस्सा ही मिल पाएगा। इस दावे को सिरे से नकारते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह आंकड़ा आजादी के समय से ही स्थिर रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि चाहे 1951, 1963, 1973 या 2008 का परिसीमन रहा हो, दक्षिण भारत का हिस्सा हमेशा 24 प्रतिशत ही रहा है। उन्होंने कहा, "इसमें कुछ भी नया नहीं है। सीटों में जो भी बढ़ोतरी होगी, वह जनसंख्या के अनुपात के हिसाब से ही की जाएगी।"दरअसल दक्षिण भारतीय राज्यों को यह डर सता रहा है कि उत्तर भारतीय राज्यों में जनसंख्या तेजी से बढ़ी है, इसलिए वहां सीटें ज्यादा बढ़ जाएंगी और दक्षिण भारत का प्रभाव कम हो जाएगा।
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