बीजिंग , मई 08 -- 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली वर्षगांठ पर चीन ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि पिछले साल भारत के साथ चार दिनों तक चले सैन्य संघर्ष के दौरान उसने पाकिस्तान को तकनीकी सहायता प्रदान की थी।
चीन के सरकारी प्रसारक 'सीसीटीवी' से बात करते हुए 'एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ऑफ चाइना' (एवीआईसी) के इंजीनियर झांग हेंग ने बताया कि उन्हें मई 2025 में झड़पों के दौरान पाकिस्तानी वायु सेना को 'ऑन-साइट तकनीकी सहायता' देने के लिए तैनात किया गया था। एवीआईसी वही सरकारी कंपनी है जो चीन के उन्नत लड़ाकू विमानों और ड्रोन कार्यक्रमों के पीछे है।
श्री झांग ने इस दौरान पाकिस्तान द्वारा चीन निर्मित 'चेंगडू जे-10सीई' लड़ाकू विमानों के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इस विमान ने कम से कम एक 'राफेल' लड़ाकू विमान को मार गिराया था, हालांकि इस दावे की अब तक कोई पुष्टि नहीं हुई है और इसे बेहद संदिग्ध माना जा रहा है। गौरतलब है कि जे-10सीई चीन के जे-10सी का ही संस्करण है, जिसे चीन ने पाकिस्तान को दिया है।
चीनी इंजीनियर ने बताया कि मई की भीषण गर्मी में, जब तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब था, उनकी टीम मानसिक और शारीरिक रूप से कठिन परिस्थितियों में पाकिस्तानी वायु सेना के उपकरणों को उनकी पूरी युद्ध क्षमता के साथ संचालित करने में जुटी थी।
यह स्वीकारोक्ति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन ने अब तक 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किसी भी प्रत्यक्ष परिचालन या तकनीकी भागीदारी की पुष्टि नहीं की थी। हालांकि, लंबे समय से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि चीन ने उपग्रह खुफिया जानकारी, रसद और सिस्टम सपोर्ट के माध्यम से पाकिस्तान की मदद की थी।
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