बीजिंग , दिसंबर 05 -- चीन ने जापान से द्वितीय विश्व युद्ध में पराजित देश के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने, युद्धोत्तर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को चुनौती देना बंद करने तथा एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता को नुकसान पहुंचाने से बचने का आग्रह किया।
चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जियांग बिन ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह टिप्पणी जापानी सरकार द्वारा रक्षा व्यय में वृद्धि को मंजूरी देने और फिलीपींस के साथ जापानी मिसाइल के निर्यात पर बातचीत करने के संदर्भ में की।
श्री जियांग बिन ने जापान की आलोचना करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में जापान ने बार-बार अपने शांतिवादी संविधान के तहत दी गई प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन ,रक्षा बजट में भारी वृद्धि और घातक हथियारों के निर्यात को बढ़ावा दिया है तथा अपने तीन गैर-परमाणु सिद्धांतों में संशोधन करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा, "जापान ने सैन्य विकास पर लगी पाबंदियों को तेजी से ढीला किया है, जिससे जापान में सैन्यवाद के फिर से उभरने का खतरा पैदा हो गया है।"उन्होंने जापान की यह भी आलोचना की कि उसने चीन में अपने आक्रमण काल के दौरान छोड़े गए रासायनिक हथियारों के समग्र निपटान प्रक्रिया में सक्रिय प्रयास नहीं किए, जिससे यह प्रक्रिया गंभीर रूप से विलंबित हुई है। उन्होंने कहा कि चीन पर आक्रमण के दौरान जापानी सैन्यवादियों ने अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए बड़ी संख्या में रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया, जिससे दो लाख से अधिक चीनी सैनिकों और नागरिकों की मौत हुई।
उन्होंने आरोप लगाया कि द्वितीय विश्व युद्ध में हार के बाद अपने अपराध को छिपाने के लिए जापान ने चीनी क्षेत्र पर बड़ी संख्या में रासायनिक हथियार छोड़ दिए, जिससे 2,000 से अधिक लोग जहर के शिकार हुए। ये रासायनिक हथियार आज भी चीनी लोगों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा को खतरे में डाल रहे हैं तथा पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
चीन ने जापान से मांग की है कि वह निपटान प्रक्रिया को तेज करने के लिए पूरे प्रयास करे, छोड़े गए रासायनिक हथियारों की जानकारी समय पर उपलब्ध कराए, खोज और पहचान में चीन की पूरी सहायता करे तथा प्रदूषित जल और मिट्टी के उपचार की जिम्मेदारी पूरी तरह वहन करे।
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