जिरोंग , अगस्त 26 -- चीन-नेपाल के सीमावर्ती इलाके में आये भीषण भूस्खलन के बाद बुधवार रात कई विदेशी पर्यटकों समेत सैकड़ों लोग लापता हैं।

चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, सुबह करीब नौ बजे नेपाल में भूस्खलन हुआ जिसका प्रभाव तिब्बत के जिरोंग काउंटी तक दिखा।

अधिकारियों के अनुसार, यह आपदा शिगात्से शहर से संचालित एक सीमा जांच चौकी से टकरायी, जिसमें 'भारी नुकसान और बड़ी संख्या में लोगों के हताहत एवं लापता होने' की सूचना है।

'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' के मुताबिक, सोशल मीडिया पर आये वीडियो में दिखा कि कुछ ही सेकंड में भूस्खलन का मलबा चेकपॉइंट पर आ गिरा। जान बचाने के लिए लोग भागते दिखे, जिसके बाद पूरे इलाके में कीचड़ और मलबा भर गया।

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने बताया कि 93 नेपाली नागरिकों और 291 विदेशियों सहित कुल 384 पर्यटक और यात्री लापता हैं। लापता विदेशियों में भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन और नीदरलैंड के नागरिक शामिल हैं, जबकि अन्य 111 लोगों की राष्ट्रीयता की पुष्टि होना अभी बाकी है। अब तक पहचाने गए विदेशी नागरिकों में से 105 भारत से हैं। सूची में ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के यात्री भी शामिल हैं। कई अन्य लोगों की राष्ट्रीयता की पुष्टि अभी बाकी है।

एनटीबी ने कहा कि ये आंकड़े शुरुआती हैं और ट्रैवल एजेंसियों, गाइड, स्थानीय अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर इनकी पुष्टि की जा रही है। अधिकारियों ने परिवारों और यात्रियों से अपील की है कि वे पुष्टि की प्रक्रिया पूरी होने तक कोई नतीजा न निकालें।

अब तक पहचाने गए 105 भारतीय नागरिकों में से 59 'सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल्स' और 46 'लीफ हॉलिडे' के ज़रिए यात्रा कर रहे थे। वहीं 37 प्रवासी को 'हिमालयन ग्लेशियर' के तहत अलग से सूचीबद्ध किया गया है। एजेंसी-वार शुरुआती रिकॉर्ड बताते हैं कि 92 यात्री 'ट्रेकर्स सोसाइटी', 71 'सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल्स', 55 'लीफ हॉलिडे', 52 'हिमालयन ग्लेशियर' और 31 'कैलाश जर्नी' से जुड़े थे। 'फिशटेल टूर्स एंड ट्रैवल्स' ने 20 विदेशी यात्रियों की जानकारी दी, जिनमें तीन अमेरिकी नागरिक और 17 मलेशियाई शामिल हैं। 'हिमालयन ग्लेशियर' ने 37 विदेशी यात्रियों की जानकारी दी, जबकि 'अल्पाइन इको ट्रेक' ने 16 यात्रियों की जानकारी दी, जिनमें 12 ब्रिटेन से और चार दक्षिण अफ्रीका से थे।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने स्थानीय अधिकारियों को लापता लोगों की तलाश एवं बचाव, नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने, घायलों का इलाज करने और नुकसान को कम से कम करने के लिए 'कोई कसर न छोड़ने' का निर्देश दिया है। उन्होंने निगरानी प्रणाली और पूर्व चेतावनी तंत्र को मजबूत करने तथा द्वितीयक आपदाओं को रोकने के उपाय करने का भी आह्वान किया।

राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए पीपुल्स आर्म्ड पुलिस के जवानों को आपदा क्षेत्र में तैनात किया गया है। अधिकारियों ने जिरोंग चेकपॉइंट की ओर जाने वाली सड़क को सात दिनों के लिए बंद कर दिया है।

राज्य के स्वामित्व वाली निर्माण और आपातकालीन प्रतिक्रिया कंपनी 'चीन अन्नेन्ग कंस्ट्रक्शन ग्रुप' ने 200 बचावकर्मियों, भूवैज्ञानिकों और इंजीनियरों को मौके पर भेजा है, जबकि 100 अन्य कर्मियों को स्टैंडबाय पर रखा गया है। बचाव दल अपने साथ भारी मशीनरी और रीकॉनिसेन्स ड्रोन (टोही ड्रोन), 3डी लेजर स्कैनर व लाइफ डिटेक्टर जैसे आधुनिक उपकरण लाये हैं।

इस भूस्खलन से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग भी बाधित हो गया है। जिरोंग बंदरगाह तिब्बत का मुख्य विदेशी व्यापार बंदरगाह है और नेपाल के साथ चीन के अधिकतर व्यापार का संचालन यहीं से होता है।

वर्ष 2022 में महामारी के बाद से यात्रियों और माल ढुलाई की आवाजाही दोबारा शुरू होने के बाद से इस पोर्ट से व्यापार में तेजी आयी थी, जिसमें नेपाल को चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात भी शामिल है।

नेपाल स्थित चीनी दूतावास ने कहा कि उसने अपने आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को सक्रिय कर दिया है और प्रभावित क्षेत्र में मौजूद चीनी नागरिकों एवं कंपनियों की स्थिति का पता लगा रहा है। दूतावास ने नेपाल सरकार से भी बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाने का आह्वान किया है।

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