हेफेई , जनवरी 29 -- चीन के वैज्ञानिकों ने डार्क मैटर (अदृश्य पदार्थ) की खोज के लिए दुनिया का पहला क्वांटम सेंसर नेटवर्क विकसित किया है। यह नेटवर्क पूर्वी चीन के हेफेई और हांगझोउ शहरों में स्थित प्रयोगशालाओं को जोड़ता है, जिनके बीच की दूरी 300 किलोमीटर से अधिक है।
यह शोध प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका नेचर में गुरुवार को प्रकाशित हुआ। इस परियोजना का नेतृत्व यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ऑफ चाइना के वैज्ञानिकों ने किया।
डार्क मैटर को ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों में से एक माना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ब्रह्मांड में मौजूद कुल पदार्थ का लगभग 26.8 प्रतिशत हिस्सा डार्क मैटर है। यह न तो दिखाई देता है और न ही रोशनी के साथ किसी तरह की प्रतिक्रिया करता है। इसकी मौजूदगी का अनुमान केवल इसके गुरुत्वाकर्षण प्रभाव से लगाया जाता है।
इस शोध में वैज्ञानिकों ने एक्सियन नामक काल्पनिक कणों की खोज पर ध्यान केंद्रित किया। माना जाता है कि यही कण डार्क मैटर का निर्माण कर सकते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब पृथ्वी अंतरिक्ष में डार्क मैटर के ऐसे क्षेत्रों से गुजरती है, तो एक्सियन कण परमाणुओं के नाभिक पर बहुत हल्का सा प्रभाव डाल सकते हैं। यह प्रभाव इतना क्षणिक और कमजोर होता है कि उसे पकड़ना बेहद कठिन है।
इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने हेफेई और हांगझोउ में कुल पांच अत्याधुनिक क्वांटम सेंसर लगाए, जिन्हें एक साथ समन्वित किया गया। इस नेटवर्क की खासियत यह है कि किसी संकेत को तभी वास्तविक माना जाता है जब वह एक साथ कई स्थानों पर दर्ज हो। इससे स्थानीय शोर या गलत संकेतों को हटाने में मदद मिलती है।
शोध के अनुसार, नयी क्वांटम प्रवर्धन तकनीक से बेहद कमजोर संकेतों को सौ गुना तक बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा, सिग्नल को पकड़ने की समय-सीमा को कुछ सेकंड से बढ़ाकर कई मिनट तक किया गया है, जिससे डार्क मैटर के संकेतों को पहचानने की संभावना बढ़ गई है।
दो महीने की निगरानी अवधि के दौरान डार्क मैटर से जुड़ा कोई प्रत्यक्ष संकेत तो नहीं मिला, लेकिन वैज्ञानिकों ने एक्सियन और परमाणु नाभिक के बीच संभावित संपर्क की अब तक की सबसे कड़ी सीमाएं तय की हैं। यह सीमा कुछ मामलों में खगोलीय अध्ययनों से प्राप्त आंकड़ों की तुलना में 40 गुना अधिक सटीक बताई गई है।
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