देहरादून/टिहरी गढ़वाल , अप्रैल 26 -- उत्तराखंड में चिपको आंदोलन की प्रमुख नेत्री बचनी देवी की पार्थिव देह रविवार को पंच तत्व में विलीन हो गयी।
उनका अन्तिम संस्कार टिहरी गढ़वाल जनपद अंतर्गत पैतृक घाट शिवपुरी में किया गया। वे अपने पीछे पांच पुत्रों और दो पुत्रियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गईं हैं।
श्रीमती बचनी देवी का शनिवार को यहां अपने आवास पर निधन हो गया था। वह 100 वर्ष की थी।
उनके निधन पर चिपको आंदोलन व सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने शोक संवेदना प्रकट की। विकासखंड नरेंद्रनगर के अदवाणी गांव निवासी चिपको नेत्री बचनी देवी वर्ष 1977 में हेंवलघाटी के अदवाणी क्षेत्र में जब सरकार की ओर से जंगलों के व्यापारिक कटान की अनुमति मिली, तो वहां कटान का विरोध कर रहे आंदोलन के शीर्ष नेता धूम सिंह नेगी, विजय जड़धारी, सुदेशा बहिन के साथ खड़ी हो गई। उस समय गांव के प्रधान उनके पति थे, जो जंगलों के ठेकेदार भी थे। लेकिन उन्होंने जंगलों को बचाने के लिए अपने पति व परिवार से विद्रोह कर दिया।
श्रीमती बचनी ने उस समय कहा कि परिवार बाद में पहले जंगलों को बचाना है। उन्होंने आंदोलन में क्षेत्र की महिलाओं को भी संगठित करने का कार्य किया। कई दिनों तक परिवार का विरोध झेलते हुए भी वे आंदोलन में सक्रिय भागीदारी करती रही।आखिरकार सरकार को अदवाणी में जंगलों के कटान पर रोक लगानी पड़ी।
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