चित्तौड़गढ़ , फरवरी 23 -- राजस्थान में चित्तौड़गढ़ में 25 फरवरी से शुरु होने वाले भारतीय भाषाओं, संस्कृति, ज्ञान-परंपरा और लोककलाओं को समर्पित तीन दिवसीय राष्ट्रीय "चित्तौड़गढ़ साहित्य उत्सव - 2026" में देशभर के साहित्यकार, पत्रकार, कलाकार और युवा शामिल होंगे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर के श्रीसांवलियाजी विश्रांति गृह में आयोजित उत्सव में हिंदी, संस्कृत, राजस्थानी, अंग्रेज़ी और उर्दू भाषा के विभिन्न सत्र आयोजित होंगे, जिनमें जनभाषा, लोकतांत्रिक चेतना, भारतीय ज्ञान-परंपरा, सांस्कृतिक अस्मिता, वैश्विक विमर्श और साझा विरासत जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

आयोजकों ने बताया कि "भारत 2047 : भाषा, संस्कृति और विचार की दिशा" विषय पर विशेष परिचर्चा भी आयोजित होगी। इसके साथ ही छात्र-युवा केंद्रित लेखन कार्यशाला, पुस्तक लोकार्पण, लेखक संवाद और तीन दिवसीय पुस्तक मेले का आयोजन रहेगा।कार्यक्रम के दौरान आर्ट गैलरी एवं लोककला प्रदर्शनी, लुप्त होती लोककलाओं के संरक्षण के लिये विशेष प्रस्तुतियाँ, शास्त्रीय नृत्य कथक, राजस्थान की पारंपरिक भवाई, कठपुतली शो, नाटक मंचन, 100 कलाकारों की भव्य सांस्कृतिक संध्या और रात्रि काव्य गोष्ठी आयोजित की जाएगी। समापन अवसर पर "चित्तौड़गढ़ साहित्य-संस्कृति घोषणा पत्र - 2026" जारी किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि उत्सव में राजस्थान सरकार की समस्त कला, साहित्य एवं संस्कृति अकादमियाँ भी सहभागिता निभा रही हैं। आयोजन के आयोजक यूथ मूवमेंट राजस्थान के संस्थापक अध्यक्ष शाश्वत सक्सेना हैं, जबकि साहित्यिक संयोजन 21वीं सदी के राजस्थान साहित्यिक आंदोलन के संस्थापक एवं प्रवर्तक अनिल सक्सेना 'ललकार' द्वारा किया जा रहा है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित