रायबरेली , जुलाई 17 -- उत्तर प्रदेश के रायबरेली में एक निजी नर्सिंग होम के संचालक डॉ. अमित सिंह की गिरफ्तारी के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) का आंदोलन शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। गुरुवार को पूर्ण कार्य बहिष्कार के बाद निजी चिकित्सकों ने शुक्रवार को काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराया, जबकि ओपीडी और अस्पतालों में मरीजों का उपचार सामान्य रूप से जारी रखा।
आईएमए के आह्वान पर डॉ. संजय रस्तोगी, डॉ. संजीव जायसवाल सहित अन्य चिकित्सकों ने कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के समर्थन में नहीं, बल्कि चिकित्सक समुदाय के सम्मान, गरिमा और न्यायसंगत कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित किए जाने की मांग को लेकर है।
चिकित्सकों का कहना था कि उपचार के दौरान मरीज की मृत्यु अथवा स्थिति गंभीर होने के मामलों में जानबूझकर की गई लापरवाही और सद्भावनापूर्वक उपचार के दौरान उत्पन्न चिकित्सकीय जटिलताओं के बीच अंतर किया जाना चाहिए। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट आने से पहले किसी चिकित्सक की गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि छह जुलाई को उपचार के दौरान एक 10 वर्षीय बच्ची की तबीयत बिगड़ने के बाद लखनऊ के एक अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई थी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने नर्सिंग होम संचालक डॉ. अमित सिंह, डॉ. निशांत सिंह तथा अन्य स्टाफ के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने 15 जुलाई को डॉ. अमित सिंह को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया था। इसके बाद गुरुवार को उनकी जमानत अर्जी भी न्यायालय ने खारिज कर दी थी।
आईएमए रायबरेली ने कहा कि चिकित्सकों का सर्वोच्च दायित्व मरीजों की सेवा करना है। इसी कारण संगठन ने चिकित्सा सेवाएं बाधित किए बिना शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। संगठन ने मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और न्यायोचित जांच की उम्मीद जताते हुए कहा कि इससे चिकित्सकों का न्याय व्यवस्था और प्रशासन पर विश्वास बना रहेगा।
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