भरतपुर , मई 16 -- हजारों किलोमीटर का सफर तय करके यूरोप, अलास्का और साइबेरिया (रूस) से हर वर्ष दिसम्बर में राजस्थान में भरतपुर में अपने चार महीनों के प्रवास के लिए आने वाले दुर्लभ प्रजाति के सैकड़ों विदेशी परिंदों के अब तक भरतपुर में प्रवास को लेकर पक्षी विशेषज्ञ हैरत में हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शून्य से 10 डिग्री तक के तापमान में रहने वाले इन विदेशी परिंदे अमूमन मार्च में अपने देशों के लिए रवाना हो जाते हैं लेकिन इस वर्ष इनके 40 से 45 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी के बावजूद केवला देव राष्ट्रीय उद्यान की जगह भरतपुर के आसपास सेक्टर 13, मलाह चौराहा और बंध बारेठा बांध जैसे वेटलैंड्स में बड़ी संख्या में डटे रहने से पक्षी विशेषज्ञ हैरान हैं। पक्षियों के व्यवहार में आए इस बदलाव से वन विभाग के साथ पक्षी प्रेमी भी हैरत में पड़ गए हैं।
विभागीय सूत्रों ने इसे पारिस्थितिकी तंत्र में हो रहे बड़े बदलाव का संकेत बताया है। सूत्रों ने बताया कि इस बार पांचना बांध से भरतपुर को मिले भरपूर पानी से यहां बड़ी मात्रा में 'सीड्स बैंक' विकसित हुआ है जो पक्षियों के लिए भोजन का प्रमुख जरिया है। इसी के साथ जैव विविधता और भोजन उपलब्धता बढ़ने के चलते पक्षी आसानी से अपने भोजन का शिकार कर पा रहे हैं। ऐसे में तापमान चाहे कितना भी ज्यादा क्यों न हो, भोजन और सुरक्षा मिलती रहे तो पक्षी एक ही स्थान पर लम्बे समय तक ठहर सकते हैं।
पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार राजस्थान आने वाले प्रवासी पक्षियों में यह बदलाव लंबे समय बाद ध्यान में आया है। इससे पूरा पारिस्थितिकी तंत्र भी बदलने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि समूचे विश्व में पक्षियों का स्वर्ग कहे जाने वाले भरतपुर के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान से बाहर शहर के अलग-अलग आर्द्र भूमि में इन दिनों ब्लैक-टेल्ड गॉडविट, पाइड एवोसेट, रफ और स्पॉटेड रेडशैंक, यूरेशियन कूट जैसे करीब 15 से ज्यादा प्रजातियों के प्रवासी पक्षी अब तक मौजूद हैं। जबकि ये प्रवासी पक्षी हर वर्ष मार्च में अपना प्रवास समाप्त करके अपने वतन लौट जाते हैं।
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