कलबुर्गी , मार्च 29 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता चालवादी नारायणस्वामी ने रविवार को राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के कार्यान्वयन को लेकर बढ़ती भ्रम की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि भाषाई प्रावधानों, विशेषकर हिंदी के संबंध में छात्रों को परेशानी हो रही है।
सरकार के निर्णयों के समय की आलोचना करते हुए श्री नारायणस्वामी ने कहा कि भाषा नीति में बदलाव की घोषणा शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत में की जानी चाहिए थी, न कि उस समय जब शिक्षण पहले ही पूरा हो चुका हो और परीक्षाएं करीब हों।
भाजपा नेता ने कहा, "छात्रों को पहले ही हिंदी पढ़ाई जा चुकी है, शिक्षकों को भुगतान किया जा चुका है और अब परीक्षाओं के समय निर्णय लिए जा रहे हैं। इससे छात्र ही पीड़ित होंगे।" उन्होंने नीति में इस तरह के अंतिम समय में किए गए बदलावों को छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए अनुचित बताया।
विपक्ष के नेता ने तर्क दिया कि जहाँ भाषा सीखने को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, वहीं उचित योजना के बिना अचानक किए गए बदलाव शैक्षणिक प्रक्रिया को बाधित करते हैं और अनावश्यक अनिश्चितता पैदा करते हैं। उन्होंने छात्रों के शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए नीतिगत निर्णयों में तत्काल स्पष्टता और निरंतरता की मांग की।
इस बीच, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने मैसूरु में एनईपी पर राज्य सरकार के रुख को दोहराते हुए कहा कि हिंदी को अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए, भले ही यह नीति इस शैक्षणिक वर्ष से लागू की जानी है।
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